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चीनी सेना के लिए चोरी करवा रहे जिनपिंग, नकल करने में भी पीछे नहीं ड्रैगन आर्मी; इरादा क्या है?

 

 

चीन ने साइबर चोरी जैसे साधनों का इस्तेमाल भी किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने दूसरे देशों से युद्ध तकनीक चुराने के लिए अपने नागरिकों का इस्तेमाल किया है और उनसे साइबर चोरियां करवाई हैं।

 

चीन की सेना को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कहा जा रहा है कि चीन अपनी सेना की ताकत बढ़ाने के लिए हर हथकंडे अपना रहा है। चीन के राष्ट्रपति और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के प्रमुख शी जिनपिंग सेना की ताकत बढ़ाने के लिए किसी भी हद को पार कर रहे हैं। चीन ने दुनिया भर की डिफेंस टेक्नोलॉजी (रक्षा तकनीक) तक पहुंच हासिल करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। पॉलिसी रिसर्च ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है। इसमें कहा गया है कि चीन ने न केवल अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों से रक्षा तकनीक चुराई है बल्कि वह हर देश से इसे चुरा रहा है और उन्हें कॉपी भी कर रहा है। ड्रैगन आर्मी कॉपी की गई टेक्नोलॉजी के सहारे अपनी ताकत का निर्माण कर रही है। उसने अपने जिगरी यार रूस की टेक्नोलॉजी की नकल करने में भी संकोच नहीं किया है।

 

दूसरे देशों से युद्ध तकनीक चुरा रही PLA

चीन अपनी सैन्य शक्ति के विस्तार के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों साधनों का इस्तेमाल कर रहा है। इसने उन देशों में भी भारी मात्रा में पैसों का निवेश किया है, जिनके पास ऋण का भुगतान करने की क्षमता तक नहीं है। चीन ने साइबर चोरी जैसे साधनों का इस्तेमाल भी किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने दूसरे देशों से युद्ध तकनीक चुराने के लिए अपने नागरिकों का इस्तेमाल किया है और उनसे साइबर चोरियां करवाई हैं। द पॉलिसी रिसर्च ग्रुप (पीओआरईजी) ने पेंटागन की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि चीन अमेरिका से महत्वपूर्ण सैन्य रहस्यों को इकट्ठा करने के लिए डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी, एंटी-सबमरीन और एविएशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है।

 

एक के बाद एक गिरफ्तार हो रहे चीनी नागरिक

चीनी नागरिकों को लेकर एक चौंका देने वाला पैटर्न सामने आया है। दरअसल पिछले 6 साल में विदेशों में गिरफ्तार चीनी नागरिकों के पैटर्न पर नजर दौड़ाई गई तो पता चला कि उनमें से ज्यादातर सेना से जुड़ी जानकारियां चुराकर चीन भेज रहे थे। पॉलिसी रिसर्च ग्रुप (पीओआरईजी) के मुताबिक, इस साल 24 अक्टूबर को चीन के साथ अवैध रूप से अमेरिकी सैन्य रहस्यों को साझा करने के आरोप में चार चीनी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें से तीन नागरिक चीनी राज्य सुरक्षा मंत्रालय के अधिकारी पाए गए हैं। 2021 में, छह शिक्षाविदों को तब गिरफ्तार किया गया था जब वे एक चीनी शोध संस्थान से अपने संबंध के बारे में बताने में विफल रहे थे। गिरफ्तार किए गए लोगों में से एक मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का गैंग चेन था। हालांकि बाद में उन्हें पिछले सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया था।

 

गुस्साए अमेरिका ने बंद कराया था दूतावास

खुद को रेगुलर ग्रेजुएट छात्र बताने वाले पीएलए अधिकारियों को 2020 में एफबीआई द्वारा गिरफ्तार किया गया था। इनमें से शिन वांग ने पूछताछ के दौरान पीएलए अधिकारी होना स्वीकार किया। वह चीन में एक सैन्य लैब में मेजर के रूप में नियुक्त किया गया था। एक और चीनी पीएलए अधिकारी को गिरफ्तार किया गया था। उसने एआई की स्टडी के लिए इंडियाना विश्वविद्यालय के लुडी स्कूल ऑफ इंफॉर्मेटिक्स, कंप्यूटिंग और इंजीनियरिंग में अपना नामांकन कराया था। इन सभी संदिग्ध गतिविधियों के परिणामस्वरूप, दक्षिणी अमेरिका के ह्यूस्टन में एक चीनी वाणिज्य दूतावास को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इन सभी पीएलए अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों को सीखने और खुद को एडवांस युद्ध के लिए सक्षम बनाने के लिए विदेशी जमीं पर भेजा गया था। ऐसा नहीं है कि इन गिरफ्तारियों के बाद चीन ने अपने कदम पीछे खींचे हों। बल्कि जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी सेना ऐसी अवैध गतिविधियों में तेजी ला रही है।

 

अमेरिकी विमानों को कॉपी करने में सफल हुआ चीन?

एक अन्य, PLA अधिकारी को एक बिजनेसमैन के रूप में 2016 में गिरफ्तार किया गया था। उसने F-35, C-17 ग्लोबमास्टर और F-22 के लिए अमेरिकी योजनाओं की जासूसी की थी। उसने दो और अधिकारियों के साथ भी इसी तरह की साजिश रची थी। उन्होंने बोइंग और अन्य विमानन कंपनियों में सैन्य रहस्य चुराने के लिए उन्हें हैक किया था। आरोप है कि चीनी J-20 फाइटर जेट अमेरिका के F-22 के समान है और J-31, F-35 से मिलता जुलता है। हालांकि, चीन ने ऐसे किसी भी दावे को खारिज किया है।

 

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