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बिहार में 159 किलोमीटर के एक्सप्रेसवे खंड पर जल्द शुरू होगा काम, वाराणसी से सीधे जुड़ेगा कोलकाता

 

 

पूर्वी राज्यों में सड़क के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने इस साल 28,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर वाराणसी से कोलकाता 610 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की घोषणा की थी।

 

झारखण्ड बिहार और पश्चिम बंगाल में विकास को गति देने और मौजूदा नेशनल हाईवे 2 यानी ग्रैंड ट्रंक रोड के लोड को कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने इस साल वाराणसी से कोलकाता तक एक्सप्रेसवे बनाने को मंजूरी दी थी। इस प्रोजेक्ट में कुल 28500 करोड़ की लागत आएगी। बिहार से होकर गुजरने वाले इस एक्सप्रेसवे के लिए बिहार में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस काम को आगामी 2 से 3 महीनों के अंदर निपटा लिया जाएगा जिसके बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा किसी कंपनी को टेंडर की घोषणा की जाएगी। बिहार में इस एक्सप्रेसवे खंड से पटना से गया के रास्ते रांची और मोहनिया के रास्ते वाराणसी जाने के लिए सड़क मार्ग की उपलब्धता बेहतर हो सकेगी। वाराणसी से बनने वाले शुरू के 54 किलोमीटर खंड के लिए NHAI ने देश विदेश की कंपनियों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। वाराणसी से कोलकाता तक बनने वाले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बिहार के कैमूर, औरंगाबाद, रोहतास और गया से होकर गुजरेगा।

 

राज्य सड़क निर्माण विभाग (आरसीडी) के अधिकारियों ने बताया कि पैकेज-1 में प्रस्तावित कुल 54 किलोमीटर में से 32 किलोमीटर सड़क भारतमाला परियोजना के तहत बिहार के कैमूर जिले में बनाई जाएगी। नई सड़क मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग -2 (ग्रैंड ट्रक रोड) के समानांतर चलेगी। 32 किलोमीटर के मार्ग को शुरू करने के लिए भूमि अधिग्रहण पूरी गति से चल रहा है और यह काम शुरू होने से पहले अगले कुछ महीनों में पूरा हो जाएगा।

 

परियोजना के अगले चार-पांच सालों में पूरा होने से पटना से वाराणसी होते हुए मोहनिया और पटना-रांची से गया तक सड़क यात्रा आसान हो जाएगी। मौजूदा एनएच-2 अच्छी स्थिति में नहीं है और उसपर लोड भी बढ़ता जा रहा है, इसलिए नया एक्सप्रेसवे सड़क यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत प्रदान करेगा।

 

केंद्र सरकार ने इस साल 28,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर वाराणसी से कोलकाता से बिहार और झारखंड के रास्ते 610 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की घोषणा की थी। एक्सप्रेसवे का लगभग 159 किलोमीटर का हिस्सा कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया के रास्ते बिहार से होकर गुजरेगा। यह सड़क चतरा जिले के रास्ते झारखंड में प्रवेश करेगी और लगभग 116 किमी की यात्रा के बाद बोकारो से हजारीबाग और रामगढ़ होते हुए पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले से बाहर निकलेगी।

 

एनएचएआई के टेंडर दस्तावेज का हवाला देते हुए आरसीडी अधिकारी ने बताया कि बिहार में चौंदौली-चैनपुर रोड के खैन्टी गांव जंक्शन से भभुआ-अधौरा रोड पर पालका गांव तक बिहार में एक्सप्रेसवे के 32 किलोमीटर के हिस्से को बनाने के लिए 945.24 करोड़ रुपये मिले हैं। सड़क का निर्माण अगले साल जनवरी में शुरू होगा। एनएचएआई ने योग्य निर्माण फर्म का चयन करने और दिसंबर के अंतिम सप्ताह में कार्य आदेश आबंटित करने का कार्यक्रम तय किया है।

 

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 13 नवंबर को बक्सर में पुनर्निर्मित कोईलवर-बक्सर एनएच के उद्घाटन के अवसर पर घोषणा की थी कि बिहार में अमेरिका की गुणवत्ता वाली सड़कें बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा था कि बिहार में विभिन्न ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर काम चल रहा है और जल्द ही इससे क्षेत्र में विकास को गति मिलेगी और सड़कों से यातायात व्यवस्था भी बेहतर होगी।

 

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