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दिखने लगा सूखा संकट का असर : सूबे के मजदूरों का दूसरे राज्यों में पलायन, मनरेगा मजदूरों की संख्या में 75 फिसदी गिरावट

 

 

भादो में भी बारिश नहीं होने के कारण फसलों पर इसका प्रभाव निश्चित है। ऐसे में खेती में काम कर जीवन-बसर करने वाले कामगारों ने बिहार से पलायन करना शुरू कर दिया है। पलायन करने वालों में 99 फीसदी पुरुष हैं

बिहार में कम बारिश के कारण सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई है। शत-प्रतिशत धान की रोपनी नहीं हो सकी। जो फसल लगी है, उसे बचाने के लिए किसान जद्दोजहद कर रहे हैं। भादो में भी बारिश नहीं होने के कारण फसलों पर इसका प्रभाव निश्चित है। ऐसे में खेती में काम कर जीवन-बसर करने वाले कामगारों ने बिहार से पलायन करना शुरू कर दिया है। बिहार से खुलने वाली ट्रेनों व बसों में भीड़ से इसे आसानी से समझा जा सकता है।

बिहार से हर साल कितने लोग बाहर रोजी-रोजगार के लिए जाते हैं, इसका कोई अधिकृत आंकड़ा श्रम संसाधन विभाग के पास नहीं है। लेकिन दिल्ली की एक गैर सरकारी संगठन की रिपोर्ट की मानें तो बिहार से हर साल 40 लाख से अधिक लोग पलायन करते हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि पंजाब में बिहारियों की संख्या कम होने का यह कतई अर्थ नहीं कि लोग अब बाहर नहीं जा रहे हैं। पहले जहां लोग कृषि क्षेत्र में काम करने के लिए पंजाब जाया करते थे। अब वे औद्योगिक क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। इसलिए उनकी दिलचस्पी पंजाब के बदले दिल्ली, गुजरात व महाराष्ट्र में बढ़ गई है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पलायन करने वालों में 36 फीसदी एससी-एसटी तो 58 फीसदी ओबीसी समुदाय के लोग हैं। पलायन करने वालों में 58 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। आकलन के अनुसार पलायन करने वालों में 65 फीसदी के पास खेती योग्य जमीन नहीं है। पलायन करने वालों में आधे से अधिक लोग अकेले ही जाया करते हैं। परिवार के साथ बाहर जाकर काम करने वालों की संख्या काफी कम होती है। पलायन करने वालों में 99 फीसदी पुरुष हैं। पलायन करने वालों में 50 हजार सालाना पैसा भेजने वालों की संख्या मात्र पांच-सात फीसदी रहती है। जबकि महीने का एक हजार भेजने वालों की संख्या 15 से अधिक है।

मनरेगा मजदूरों की संख्या घटकर एक चौथाई

दूसरी ओर मनरेगा में रोज काम करने वाले मजदूरों की संख्या पिछले दो माह से घटते-घटते अब एक चौथाई पर आ पहुंची है। जून-जुलाई में मजदूरों को मजदूरी नहीं मिलने से यह नौबत आई है। जून के प्रथम सप्ताह में मनरेगा में रोज काम करने वालों की संख्या 22 लाख तक पहुंच गई थी, जो घटकर पांच लाख 20 हजार पर आ गई है।

जिलों से रोज जानकारी ली जा रही

ग्रामीण विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिलों के प्रतिदिन मनरेगा से संबंधित जानकारी ली जा रही है। मनरेगा में मजदूरों की मजदूरी का भुगतान सात जून, 2022 से ही बंद था। 18 जुलाई को केंद्र सरकार ने 591 करोड़ की राशि जारी की पर तकनीकी कारणों से इसका भी भुगतान नहीं हो पाया। इस कारण मजदूरी का बकाया 1496 करोड़ पहुंच गया था।

 

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