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एक आदत ने लड़की को पहुंचा दिया अस्पताल, ऑपरेशन में पेट से निकला तीन किलो बालों का गुच्छा

 

 

कानपुर के प्राइवेट निजी अस्पताल में हुए ऑपरेशन के दौरान लड़की के पेट से 3 किलो बालों का गुच्छा निकला। परिजनों ने बताया कि किशोरी को बचपन में बाल खाने की आदत थी।

 

बचपन से शुरू हुई लड़की की एक आदत ने सीधे अस्पताल पहुंचा दिया। समय रहते उसका इलाज हुआ तो असलियत सामने आई। लड़की की यह आदत धीरे-धीरे जानलेवा बनती जा रही थी। 16 साल की उम्र में जब दर्द हुआ तो उसे अस्पताल ले जाया गया। यहां लड़की का ऑपरेशन हुआ। यह पूरा वाक्य यूपी के कानपुर जिले के एक प्राइवेट अस्पताल में कैद किया गया। ऑपरेशन के दौरान बाकायदा इसका वीडियो बनाया गया। ऑपरेशन के समय लड़की के पेट से जो निकला उसे देखकर डॉक्टर भी अचंभित रह गए। दरअसल कानपुर के प्राइवेट निजी अस्पताल में हुए ऑपरेशन के दौरान लड़की के पेट से 3 किलो बालों का गुच्छा निकला। परिजनों ने बताया कि किशोरी को बचपन में बाल खाने की आदत थी।

 

पनकी के गंभीरपुर निवासी संजय पेशे से पेंटर है। उनकी 16 साल की बेटी अंजलि को जनवरी महीने में पेट दर्द की शिकायत हुई‌। जिस पर परिजन आसपास के डॉक्टरों से इलाज कराते रहे। लेकिन गत 20 तारीख को पेट दर्द की समस्या बढ़ जाने पर किशोरी को आवास विकास 1 के डॉक्टर अरूण को दिखाया गया। जिन्होंने परिजनों से किशोरी के पेट का अल्ट्रासाउंड कराने की बात कही । अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में पेट में एक ट्यूमर सा दिखा। जिस पर परिजनों ने रामा कॉलेज के सर्जन डॉक्टर मनोज सोनकर से संपर्क किया। मनोज सोनकर ने रिपोर्ट देखकर तत्काल ऑपरेशन की बात कही। किशोरी को कल्याणपुर के श्री हॉस्पिटल एंड मेटरनिटी सेंटर ऑपरेशन के लिए भर्ती कराया गया। जहां पर डॉक्टर मनोज सोनकर ने 2 घंटे के ऑपरेशन के बाद किशोरी के पेट से 3 किलो वजन का बालों का गुच्छा निकाला।

 

ट्राईको बेजोर नामक बीमारी से ग्रसित किशोरी

डॉ मनोज सोनकर ने बताया कि किशोरी ट्राईको बेजोर नामक बीमारी से ग्रसित थी। इस बीमारी के कारण छोटे बच्चे बालों के गुच्छे खाने लगते हैं। यह प्रक्रिया 10 से 15 साल की उम्र तक भी चल सकती है। हालांकि किशोरी के परिजनों ने बताया कि उनकी बेटी बचपन में ही बालों के गुच्छे खाती थी। जिसे डांटने के बाद उसने इसे खाना बंद कर दिया था।

10,000 गैस्ट्रो सर्जरी में निकलता है एक केस

सर्जन डॉक्टर मनोज सोनकर ने बताया कि लगभग 10,000 गैस्ट्रो सर्जरी के दौरान इस तरह के एक या दो केस होते हैं।

चंदा कर कराया गया था ऑपरेशन

किशोरी के परिजनों की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। जिस पर इलाके के भानु ने अन्य लोगों के साथ मिलकर चंदा किया। साथ ही कल्याणपुर के विपिन कुमार ने भी इस ऑपरेशन में हर संभव मदद की। जिसके बाद किशोरी का सकुशल इलाज कराया गया।

 

 

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