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गुजरात: 25 सीटों पर दलित मतदाताओं का दबदबा, जानें- किस करवट बैठेगा 8% वोट बैंक?

 

 

गुजरात में दलित मतदाता बंटे हुए हैं। वे दोनों दलों को वोट करते आए हैं। राज्य में बीजेपी 27 साल से सत्ता में है। इस अवधि के चुनावों में दलितों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों का समर्थन किया है।

 

गुजरात की 182 विधानसभा सीटों में से 25 सीटों पर दलित जातियों का दबदबा माना जाता है। इनमें से 13 सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं, जबकि 12 अन्य सीटें ऐसी हैं, जहां दलित मतदाता की आबादी 10 फीसदी से ज्यादा है और वे वहां हार-जीत तय करते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस बार के चुनाव में आम आदमी पार्टी के उतरने की वजह से दलित वोटों का बिखराव हो सकता है।

 

 

2017 के विधान सभा चुनावों में बीजेपी ने 13 में से सात पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस ने पांच और एक निर्दलीय (जिग्नेश मेवाणी) ने जीत दर्ज की थी।  मेवाणी ने वडगाम से चुनाव जीता था, जिसे कांग्रेस का समर्थन हासिल था। राज्य में करीब आठ फीसदी आबादी दलित है।

 

बीजेपी ने 1995 के विधान सभा चुनावों में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 13 सीटों में से अधिकांश पर जीत दर्ज की थी। 2007 और 2012 में बीजेपी ने क्रमशः 11 और 10 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस ने दो और तीन सीटों पर जीत हासिल की थी। 2017 में, बीजेपी ने इन 13 सीटों में से केवल सात सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस ने पांच सीटें जीतीं। गढ़ाडा से कांग्रेस विधायक प्रवीण मारू ने 2020 में इस्तीफा दे दिया और 2022 में भाजपा में शामिल हो गए। इस निर्वाचन क्षेत्र में उपचुनाव में भाजपा के आत्माराम परमार ने जीत हासिल की।

 

सी-वोटर के एक ताजा सर्वे में बताया गया है कि गुजरात में 37 फीसदी दलित मतदाता बीजेपी की तरफ, जबकि 34 फीसदी कांग्रेस और 24 फीसदी आप को वोट कर सकते हैं। 5 फीसदी दलित वोटर्स अन्य को भी वोट कर सकते हैं। 2017 में  कांग्रेस को दलितों का 53 फीसदी वोट मिला था, जबकि बीजेपी अपने दलित वोट बैंक को बरकरार रखने में कामयाब दिख रही है। यानी कांग्रेस के बड़े वोट बैंक में आम आदमी पार्टी सेंधमारी करती दिख रही है।

 

जानकार बताते हैं कि गुजरात में दलित मतदाता बंटे हुए हैं। वे दोनों दलों को वोट करते आए हैं। राज्य में बीजेपी 27 साल से सत्ता में है। इस अवधि के चुनावों में, दलितों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों का समर्थन किया। दलितों को आकर्षित करने के लिए भाजपा ने भी कई पहल की हैं। सत्ता में होने के कारण, दलित नेताओं को विभिन्न निकायों में पद दिए गए थे। आप के आने से 8 फीसदी वोट तीन हिस्सों में बंट सकते हैं।

 

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