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बड़ा खुलासाः 8 मुंशी बहाल कर उगाही करते थे पटना के CO साहब, हर दाखिल-खारिज पर 15 हजार

 

 

सीओ ने कंकड़बाग में संचालित प्राइवेट कार्यालय में कामकाज निष्पादित करने के लिए अवैध तरीके से आठ मुंशी को तैनात किया था। ये अवैध मुंशी आम लोगों से पैसा लेकर काम करते थे। प्रति केस 15 हजार लिए जाते थे।

 

बिहार की राजधानी पटना के संपतचक अंचलाधिकारी नंद किशोर निराला के कारनामे परत दर परत खुलते जा रहे हैं। कंकड़बाग के एक निजी मकान में संपतचक अंचल के कर्मचारियों द्वारा संचालित निजी कार्यालय की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में पता चला है कि सीओ साहब अपने नीजी कार्यालय में मुंशी बहाल करके जनता से उगाही करते थे। दाखिल-खारिज समेत हर काम के लिए रेट भी फिक्स कर दिया गया था।

 

पटना सदर एसडीएम श्रीकांत कुंडलिक खंडेकर की जांच में यह खुलासा हुआ है कि अंचल कार्यालय के कर्मचारियों ने कंकड़बाग में संचालित प्राइवेट कार्यालय में कामकाज निष्पादित करने के लिए अवैध तरीके से आठ मुंशी को तैनात किया था। ये अवैध मुंशी आम लोगों से पैसा लेकर काम करते थे। वहां प्रत्येक दाखिल-खारिज और भूमि के परिमार्जन के लिए लोगों से अवैध तरीके से 15 हजार रुपये लिया जाता था। यह दर न्यूतम थी। जमीन कहां है, कितनी कीमत की है, इन बातों पर रेट तय किया जाता था। व्यावसायिक इलाकों का रेट भी उसी के अनुरूप लगता था।

 

ये हैं अवैध मुंशी, होंगे गिरफ्तार

एसडीएम की जांच रिपोर्ट में इन सभी मुंशी का नाम का खुलासा किया गया है जिसमें मनोज कुमार, नागेंद्र कुमार सिंह, मनोज कुमार 2, संजीत कुमार, उपेंद्र कुमार, गोविंद कुमार, धीरेंद्र कुमार और नन्हे जी शामिल हैं। सभी मुंशी का विस्तृत विवरण जुटाया जा रहा है। इन्हें जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।

 

यह है मामला

शुक्रवार की रात नौ बजे एक व्यक्ति ने पटना के जिलाधिकारी डॉ चंद्रशेखर सिंह को को दूरभाष पर सूचना दी गई थी कि संपतचक के अंचल अधिकारी नन्द किशोर प्रसाद निराला कंकड़बाग में पत्रकार नगर थाना क्षेत्र के ऑरेंज होटल के बगल के एक मकान में अवैध ढंग से अपना कार्यालय खोले हुए हैं। जिलाधिकारी ने अनुमंडल पदाधिकारी, पटना सदर श्रीकांत कुंडलिक खंडेकर को आरोपों की जांच के लिए  पत्रकार नगर थाना को साथ लेकर स्पॉट पर भेजा। एसडीएम जब मौके पर पहुंचे तो हैरान रह गए। वहां राजस्व कार्यालय की तर्ज पर गुप्त ऑफिस चलाया जा रहा था। मौके पर दलाल भी मौजूद थे जिनसे सरकारी सूचनाएं शेयर की जा रही थीं।

 

 

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