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कुख्यात श्रीप्रकाश शुक्ला के साथ नामजद था बाहुबली राजन तिवारी, 17 साल से जारी था NBW

 

 

गैंगेस्टर के मामले में फरार चल रहे बाहुबली पूर्व विधायक राजन तिवारी को बिहार के रक्सौल बार्डर से गोरखपुर की कैंट पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार किया है। वह नेपाल भागने के फिराक में था।

गैंगेस्टर के मामले में फरार चल रहे बाहुबली पूर्व विधायक राजन तिवारी को बिहार के रक्सौल बार्डर से गोरखपुर की कैंट पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार किया है। वह नेपाल भागने के फिराक में था। कुख्यात श्रीप्रकाश शुक्ला के साथ गैंगस्टर के केस में नामजद राजन तिवारी के खिलाफ 17 साल से गैर जमानती वारंट (NBW) जारी हो रहा था। इसकी जानकारी होने पर पिछले एक महीने से राजन तिवारी की तलाश में गोरखपुर पुलिस लगी थी। शाम पांच बजे उसे गोरखपुर में गैंगस्टर की कोर्ट में पेश किया गया। वहां से 14 दिनों की रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

यूपी के टॉप 61 माफियाओं की सूची में बाहुबली राजन तिवारी का नाम शामिल होने के बाद मुकदमों की पड़ताल शुरू हुई तो पुलिस अफसरों को एनबीडब्ल्यू की जानकारी हुई थी। यही नहीं जिस कैंट थाने में यह केस दर्ज हुआ था, वहां से फाइल भी गायब हो गई थी। अफसरों के जवाब मांगने पर कैंट पुलिस अपने यहां दर्ज सभी मुकदमों में राजन तिवारी को क्लीनचिट देती रही।

बिहार यूपी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मिली सफलता

खेल खुलने के बाद अफसरों ने सख्ती की तब गैर जमानती वारंट के आधार पर पुलिस ने राजन की तलाश शुरू की है। आप के अखबार ‘हिन्दुस्तान’ के जरिये जब यह खबर सामने आई तब पूर्व विधायक, राजन तिवारी ने कहा था कि पुलिस की गलती से मेरे ऊपर एनबीडब्ल्यू जारी हुआ है। पुलिस ने सही से पड़ताल की होती तो पता चलता कि जिस दौरान यह एनबीडब्ल्यू जारी किया गया उस समय मैं जेल में था। वर्ष 2012 से 2014 तक तो गोरखपुर जेल में ही था।

इस मामले में था एनबीडब्ल्यू

15 मई 1998 को कैंट पुलिस ने शिव प्रकाश उर्फ श्रीप्रकाश शुक्ला, अनुज सिंह, राजन उर्फ राजेन्द्र तिवारी और आनंद पाण्डेय सहित चार लोगों पर गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की थी। इसमें श्रीप्रकाश शुक्ला को गैंग लीडर तो अन्य को सक्रिय सदस्य बनाया गया था।

इस मामले में राजन तिवारी के हाजिर न होने पर 14 दिसम्बर 2005 को कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया। तब से सौ से ज्यादा वारंट जारी हुए पर कैंट पुलिस के रिकार्ड में कभी पहुंचे ही नहीं। रिकार्ड में चढ़ाए बिना ही वारंट गायब करने का खेल 2022 तक चलता रहा।

प्रदेश की माफिया सूची में नाम आने के बाद शुरू हुई जांच

योगी सरकार 2.0 में शिकंजा कसने के लिए प्रदेश के सभी जिलों से माफिया और बड़े बदमाशों की सूची बनी तो इसमें पूर्व के मुकदमों के आधार पर गोरखपुर के रहने वाले पूर्व विधायक राजन तिवारी का नाम भी शामिल किया गया। राजन के मुकदमों का ब्योरा जुटाने और अब तक हुई कार्रवाई के आंकलन में पुलिस जुटी तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला कि गोरखपुर की कैंट पुलिस अपने रिकार्ड में पूर्व विधायक को क्लीनचिट देती रही। यह बताया जाता रहा है कि राजन की अब आपराधिक गतिविधियों में सक्रियता नहीं है वहीं पूर्व में दर्ज मुकदमों में दोष मुक्त का फैसला भी आ गया है।

एडीजी ने कराई छानबीन तो खुला पुलिस का खेल

एडीजी अखिल कुमार ने जब इसकी छानबीन कराई तो न सिर्फ राजन तिवारी के मुकदमे की जानकारी हुई बल्कि 1998 में दर्ज गैंगस्टर के मुकदमे में जारी गैर जमानती वारंट का भी पता चला। इस मामले में जब अफसरों ने कैंट पुलिस से पूछा तो पता चला कि उसे किसी वारंट की जानकारी ही नहीं है। इसके बाद पूरा खेल पकड़ में आया। और राजन तिवारी की गिरफ्तारी के लिए सीओ कैंट के नेतृत्व में एसएसपी ने एक टीम बनाई थी। पिछले एक महीने से यह टीम राजन तिवारी की तलाश में जुटी थी। बिहार के मोतिहारी जिले में लोकेशन मिलने के बाद टीम ने बिहार पुलिस की मदद से गिरफ्तार कर लिया।

राजन के तरफ से की गई थी एनबीडब्ल्यू पर स्थगन की मांग

12 जुलाई 2022 को गैंगस्टर के मुकदमे में तारीख थी। इस दौरान पूर्व विधायक राजन तिवारी के अधिवक्ता ने गैर जमानती वारंट के स्थगन की मांग की थी। यह बताया गया था कि राजन तिवारी के 1999 से 2014 तक जेल में रहने के दौरान जारी गैर जमानती वारंट की जानकारी नहीं हो पाई। यही नहीं जिन दो मुकदमों को गैंगस्टर के लिए आधार बनाया गया है उसमें से एक में दोष मुक्त होने तथा एक का विचारण चलने की भी कोर्ट को जानकारी दी गई थी। इस मामले में कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली थी और कोर्ट ने एनबीडब्ल्यू बरकरार रखा था।

हत्या के दो मुकदमों में श्रीप्रकाश के साथ राजन भी आरोपित

वर्ष 1996 में कैंट थाने में हत्या के दो मुकदमों में श्री प्रकाश शुक्ला के साथ राजन तिवारी को भी अभियुक्त बनाया गया था। इन मुकदमों में एक में शास्त्री चौक पर चंद्रलोक लॉज के सामने वीरेन्द्र शाही पर हमला हुआ था जिसमें उनका गनर मारा गया था। वहीं दूसरा मुकदमा ठेकेदार विवेक सिंह की हत्या से जुड़ा था। पार्क रोड पर वन विभाग के आफिस के सामने विवेक सिंह की हत्या हुई थी। यह हत्या रेलवे के ठेके को लेकर हुई थी। हत्या से पहले रेलवे के बीजी आफिस पर टेंडर लेने से विवेक सिंह को रोका गया था।

2019 भाजपा ज्वाइन करने पर विवाद

गोरखपुर के गगहा थाना क्षेत्र के सोहगौरा गांव निवासी राजन तिवारी पर यूपी व बिहार में 40 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। बिहार में पूर्वी चंपारण के गोविंदगंज सीट से दो बार विधायकी जीतने वाले राजन तिवारी ने 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लखनऊ में भाजपा की सदस्यता ली थी। जिस पर विवाद होने के बाद पार्टी ने राजन को साइड लाइन कर दिया था। हालांकि राजन तिवारी ने खुद को भाजपा नेता ही बताया। इससे पहले उन्होंने 2016 में बीएसपी भी ज्वाइन की थी।

एडीजी जोन अखिल कुमार के अनुसार बदमाशों और माफियाओं के मुकदमे में पैरवी कर सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे ‘आपरेशन शिंकजा’ अभियान में राजन तिवारी के मुकदमे को शामिल किया गया है। इस साल राजन को माफिया सूची में भी शामिल कराया गया है। राजन के केस की पड़ताल के बाद पता चला कि गैंगस्टर के मुकदमे में एनबीडब्ल्यू जारी है। एसएसपी ने स्वयं इसकी निगरानी शुरू की और टीम बनाकर दबिश दी गई जिसके आधार पर राजन को गिरफ्तार किया गय है।

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