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निजी अस्पतालों में भी गंभीर टीबी मरीजों का होगा मुफ्त इलाज, नीतीश सरकार के स्वास्थ्यमंत्री मंगल पांडेय की घोषणा

 



स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम के तहत अब निजी क्षेत्र के चयनित अस्पतालों में भी गंभीर टीबी रोगियों को मुफ्त या सीमित खर्च पर इलाज की सुविधा मिलेगी। विभाग चयनित निजी अस्पतालों में ड्रग रेजिस्टेंट (डीआर) सेंटर खोलेगा, ताकि वहां ऐसे मरीजों का मुफ्त या सीमित खर्च पर बेहतर उपचार मिल सके। प्रथम चरण में राज्य के कुछ प्रमुख निजी अस्पतालों से इस संबंध में बात हुई है। 

सोमवार को श्री पांडेय ने कहा कि निजी अस्पतालों में टीबी के गंभीर मरीजों का इलाज खर्चीला होता है। इस कारण गरीब तबकों को इलाज में परेशानी होती है। ऐसे में इन अस्पतालों में मुफ्त या सीमित खर्च पर इलाज की सुविधा मुहैया करवायी जाएगी। डीआर- टीबी संक्रमण का एक भयावह रूप है। इसमें प्रथम-लाइन की प्रमुख दवाएं (रिफाम्पिसिन, आइसोनिआजिड) बेअसर हो जाती हैं।  ससमय इसका इलाज नहीं होने पर मरीज की मृत्यु भी हो सकती है। 

श्री पांडेय ने कहा कि गंभीर टीबी रोगियों के बेहतर इलाज के लिए विभाग द्वारा नई रणनीति के तहत कार्य किया जा रहा है। शीघ्र ही इसके लिए एक टेंडर प्रकाशित कर ऐसे अस्पतालों का चयन इलाज के लिए किया जाएगा, जिससे टीबी रोगियों को गंभीर अवस्था से निकालने में और मदद मिलेगी। भारत सरकार द्वारा जारी प्रोग्रामेटिक मैनेजमेंट ऑफ ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के अनुसार राज्य के जिलों में जिला यक्ष्मा केंद्रों पर डिस्ट्रिक्ट डीआर टीबी सेंटर तथा 6 मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल में नोडल डीआर टीबी सेंटर में निःशुल्क जांच एवं उपचार का प्रावधान है।  

  

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