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कोरोना के आगे बेबस हुई मानवता, मां-बेटी ने घर में दम तोड़ा, रिश्तेदार और पड़ोसियों ने नहीं की कोई मदद

 


पटना जिले के बेउर थाना के हुलास बिहार फेज टू में मां और बेटी की संदिग्ध स्थिति में मौत हो गयी। मरने वाले में हुलास बिहार फेज टू निवासी सचिवालय वित्त विभाग से रिटायर्ड राजेंद्र प्रसाद की 68 वर्षीय पत्नी चिंतामणि देवी व 38 वर्षीय तलाकशुदा पुत्री वंदना देवी है। दोनों पिछले कुछ दिनों से सर्दी और खांसी से ग्रासित थीं। घर पर दवा खा रही थीं। इसी को कोरोना संक्रमण से जोड़ कर मौत की वजह बताया जा रहा है। हालांकि उनकी कोरोना जांच नहीं हुई।

पहले पत्नी की मौत शुक्रवार दोपहर दो बजे हुई फिर शाम चार बजे बेटी की भी मौत हो गई। यानी 18 घंटे तक शव घर में पड़ा रहा लेकिन मोहल्लेवाले और रिश्तेदार मदद के लिए आगे नहीं आए। कोरोना के आगे मानवता ने भी यहां दम तोड़ दिया। पत्नी व बेटी की मौत के बाद बुजुर्ग राजेंद्र सिंह की आंखों से कोई आंसू पोंछने तक नहीं आया। न ही कोई शवों को कंधा देने ही आगे आया।

हालांकि, राजेंद्र प्रसाद काफी मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन कोरोना से मौत की आशंका में किसी ने कोई मदद नहीं की। अंततः शनिवार को सुबह मोहल्ले के एक अधिवक्ता ने आगे आकर कुछ लोगों के साथ बेउर थाना पहुंच इसकी सूचना दी। जिसके बाद बेउर थानाध्यक्ष ने इसकी सूचना प्रखंड विकास फुलवारीशरीफ व अन्य पदाधिकारी को दी। तब मोर्चरी एंबुलेंस आई और शव को कब्जे में लेकर अंतिम संस्कार कराया गया। 

शव को उठाकर एंबुलेंस पर रखने वाला भी नहीं था। किसी तरह मोर्चरी एंबुलेंस पर शव को रखा गया। मौत का कारण राजेंद्र प्रसाद ने कोरोना होने की आशंका जाहिर की। हालांकि, दोनों की कोरोना जांच नहीं हुई थी। बगैर जांच के ही बुखार, खांसी व सर्दी की दवा चल रही थी। राजेंद्र प्रसाद की पुत्री वंदना के एक दस वर्षीय पुत्र श्रीकृष्ण विष्णु है। घर में चार लोग ही थे। अब घर में बुजुर्ग राजेंद्र प्रसाद और उनका नाती ही बचा है। 

पड़ोसियों ने बताया कि राजेंद्र प्रसाद के तीन पुत्र हैं व सबसे छोटी एक पुत्री थी। तीन पुत्र में दो भागलपुर में रहते हैं और एक पटना के ही दानापुर में रहता है। इस संबंध में सीएचसी प्रभारी आरके चौधरी ने कहा कि मां-बेटी की मौत की सूचना मिली है। परिवार वालों की कोविड जांच कराने को कहा गया है। वहीं, बेउर थानाध्यक्ष मनीष कुमार ने कहा कि मानवता के नाते मदद करनी चाहिए थी, कम से कम पुलिस को कॉल करते तो दोनों की जान बचाई जा सकती थी। 

अपने टूटे पैर को लेकर लगाते रहे मदद की गुहार
राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि मेरी पत्नी चिंतामणि देवी व पुत्री वंदना को पिछले पांच दिनों से बुखार, खांसी और सर्दी थी। हमारे पैर में रॉड लगी हुई है। इस वजह से ज्यादा कहीं जाकर नहीं दिखा पा रहे थे। आसपास के मेडिकल से दवा लाकर दे रहे थे किसी तरह से। लेकिन बीमारी में कोई कमी नहीं हो रही थी। वहीं शुक्रवार को दिन में दो बजे पत्नी की अचानक खांसी बढ़ गयी और उल्टी होने लगी। इसके बाद मौत हो गयी। बीमार छोटी पुत्री वंदना के साथ भी ठीक इसी तरह हुआ और चार बजे शाम को उसकी मौत हो गयी। पत्नी की मौत के बाद से ही लगातार इधर-उधर कॉल किया, आसपास के लोगों से मदद मांगी लेकिन कोई आगे नहीं आया। 

न रिश्तेदार आए न पड़ोसी
राजेंद्र प्रसाद की बीमार पत्नी व पुत्री की खबर आसपास के सभी लोगों को थी। सभी को यह भी पता था कि राजेंद्र प्रसाद के अलावा घर में कोई नहीं है। इससे बावजूद आसपास के पड़ोसी इलाज के लिए आगे नहीं आये। यही नहीं 18 घंटे तक घर में मां और बेटी का शव पड़ा रहा। रिश्तेदार के लोगों को भी इसकी खबर मिलने पर वे सुधि तक नहीं लेने पहुंचे। हालांकि कोई पड़ोसी भी आगे नहीं आया। बस सबलोग अपने घरों से वीडियो बनाते रहे।

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