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आदापुर चिकनी का लाल बताएगा पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव को कम करने का उपाय

 


मोतिहारी। विश्व में औद्योगिक क्रांति के बाद से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ 2) की एकाग्रता में लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वायुमंडलीय सीओटू के बढ़ते स्तर को वैश्विक तापमान में वृद्धि का कारण बताया जाता है। इसके परिणामस्वरूप पर्यावरण से संबंधित और सामाजिक समस्याएं बढ़ी है। जिसमें समुद्र का स्तर बढ़ना, लगातार मौसम की घटनाएं और उच्च मृत्यु दर आदि शामिल है। जो पूरे विश्व के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है । जिसे पिछले कुछ वर्षों से जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले भय को विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के रूप में महसूस किया जा सकता है। इस कार्य को भारत का लाल अमेरिका में कर रहा है। जो बिहार प्रांत के पूर्वी चंपारण जिले के भारत-नेपाल के सीमावर्ती रक्सौल अनुमंडल आदापुर प्रखंड के चिकनी गांव निवासी अजय कुमार सिंह माता मनिकराजी देवी के पुत्र कुंदन कुमार सिंह है। केमेस्ट्री के लिए विख्यात भारत का सर्वश्रेष्ठ रिसर्च सेंटर, नेशनल केमिकल लैब पूना से डाक्ट्रेट की पढ़ाई पुरी करने के बाद अमेरिका की सबसे पुरानी युनिवर्सिटी जॉन हॉपकिस ने रिसर्च के लिए बुलाया है। इसकी जानकारी अग्रज ई. सुनील कुमार सिंह ने दैनिक जागरण को दी। श्री सिंह ने बताया कि गांव समाज में चंदन के नाम से जाना जाने वाला लड़का चंदन की तरह अपनी ज्ञान की खुशबू विदेशों में बिखेरने वाला है। जो चंदन गया विदेश रे सब कोई कहे प्लास की उक्ति को चरितार्थ कर रहा है। वह अपनी प्रारंभिक पढ़ाई रक्सौल शहर के सरस्वती शिशु मंदिर से पढ़ाई कर सीबीएससी बोर्ड से दसवीं की परीक्षा पास की। उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए आगे की पढ़ाई करते हुए बनारस हिन्दू युनिवर्सिटी से बीएससी एवं एमएससी केमेस्ट्री से किया। उन्होंने बताया कि भारत की टॉप संस्थान आईआईटी, आईआईएससी, एनसीएल आदि युनिवर्सिटी से डॉक्ट्रेट करने के बाद विदेश की सर्वश्रेष्ठ महाविद्यालय अपने यहां आमंत्रित करती है। अब वह अमेरीका में साइंटिस्ट का काम कर रहा है। बताया कि जॉन्स हॉपकिस विश्वविद्यालय, यूएसए में एक अनुसंधान केंद्र हैं । यह यूएसए का पहला शोध विश्वविद्यालय है । जिसकी स्थापना 1876 में हुई थी। डॉ. कुंदन मुख्य रूप से धातु आधारित उत्प्रेरक पर काम कर रहे हैं। जो कार्बन-डाइऑक्साइड को विद्युत रूप से सक्रिय कर दूसरे उत्पाद पर बदल सकता है। वैज्ञानिक जोखिम का यह अग्रिम स्तर ग्रीनहाउस प्रभाव की चुनौतियों के साथ-साथ ईंधन ऊर्जा और रासायनिक फीडस्टॉक के लिए सीओ 2 के उपयोग को संबोधित करने के लिए वैज्ञानिक विचार तैयार करने की अनुमति देगा। 

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