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नक्सलियों के खतरनाक मंसूबों का खुलासा, जुगाड़ से ग्रेनेड व लांचर तक बना रहे नक्सली, असलहे बनाने को कोलकाता से मंगाते हैं जरूरी सामान

 




नक्सली जुगाड़ तकनीक से अत्याधुनिक असलहे बना रहे हैं। आईईडी के अलावा ग्रेनेड और ग्रेनेड लांचर जैसे हथियार और गोला-बारूद खुद तैयार कर रहे हैं। बड़े शहरों से इसके सामान मंगाए जाते हैं और छोटी जगहों पर ढांचा तैयार होता है। ग्रेनेड को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी नक्सलियों के बीच बैठे एक्सपर्ट की है। दानापुर और जहानाबाद में पकड़े गए नक्सलियों से यह चौंकानेवाला खुलासा हुआ है।

दानापुर के गजाधर चक और जहानाबाद के बिस्तौल में पिछले दिनों खुफिया इनपुट पर एसटीएफ ने छापेमारी की थी। तलाशी में हैंड ग्रेनेड, अद्र्धनिर्मित ग्रेनेड, डेटोनेटर, फ्यूज, ग्रेनेड का ढांचा और बड़ी संख्या में दूसरे सामान मिले थे। जगाधर चक के जिस घर में छापेमारी हुई थी, वहां लेथ मशीन भी जब्त हुई थी। परशुराम सिंह, संजय सिंह और गौतम सिंह पकड़े गए थे। परशुराम और गौतम, बाप-बेटे हैं।

जहानाबाद के बिस्तौल में छुपाने की व्यवस्था 
सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में यह बात सामने आई कि इन तक ग्रेनेड, लाउंचर, आईईडी और दूसरे हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान कोलकाता से आता था। भारी मात्रा में इसे जहानाबाद के बिस्तौल में छुपाने की व्यवस्था थी। वहां से थोड़ा-थोड़ा कर ये सामान दानापुर लाए जाते थे। यहां लेथ मशीन की मदद से गौतम सिंह ग्रेनेड, लाउंचर और आईईडी का ढांचा तैयार करता था। या फिर इसे वापस बिस्तौल भेज देते या नक्सलियों तक पहुंचा दिया जाता था।

दो तरह के ग्रेनेड का होता है इस्तेमाल
ग्रेनेड सिर्फ आर्डिनेंस फैक्ट्री में बनता है। इसकी सप्लाई सेना, अद्र्धसैनिक बल और राज्य की पुलिस को होती है। लेकिन नक्सली जुगाड़ टेक्नोलॉजी से इससे बनाने में माहिर हो गए हैं। ग्रेनेड का बाहरी हिस्सा मेटल का रहता है। इसके भीतर विस्फोटक और डेटोनेटर (डीले टाइमर) लगता है। विस्फोटक के तौर पर हाई एक्सप्लोसिव का इस्तेमाल करते हैं। ग्रेनेड में दो तरह के डीले टाइमर होते हैं। एक चार व दूसरा सात सेकेंड पर विस्फोट करता है। नक्सलियों के पास से पहले भी ऐसे ग्रेनेड बरामद हुए हैं। अंतर ऊपरी सतह का है। 

नक्सलियों के पास हैं एक्सपर्ट
नक्सलियों की मिलिट्र्री विंग में बड़ी संख्या में विस्फोटक व हथियारों के एक्सपर्ट शामिल हैं। आंध्र प्रदेश में एक वक्त काफी सक्रिय रहे पीडब्ल्यूजी के नक्सली विस्फोटकों के बारे में अच्छी-खासी जानकारी रखते थे। उन्हें शुरुआती दौर में लिट्टे से प्रशिक्षण मिला था। पीडब्ल्यूजी ने उत्तर भारत के र्चुंनदा नक्सलियों को प्रशिक्षण दिया। बाद में वे दूसरों को प्रशिक्षित करते गए। 

आईईडी में प्रयुक्त होनेवाले सामान मिले
छापेमारी में आईईडी के इस्तेमाल होनेवाले मेटलिक बॉडी, ग्रेनेड बनाने में इस्तेमाल होनेवाला मेटलिक सेल, हैंड ग्रेनेड, हैंड ग्रेनेड के पार्ट, ग्रेनेड लार्उंंचग बेस, सेफ्टी पिन, सेफ्टी फ्यूज, प्रेशर स्वीच, हैंड ग्रेनेड के लिवर के अलावा ग्रेनेड लांंचर बनाने की तकनीक से जुड़ा एक कागज भी मिला था।

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