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बिहार में इथनॉल उत्पादन के 650 करोड़ के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी, इन 3 जिलों में होगी पहले शुरुआत

 


बिहार सरकार की नई इथनॉल उत्पादन प्रोत्साहन नीति निवेशकों को लुभाने लगी है। यही कारण है कि सरकार को मिलने वाले करीब तीन दर्जन निवेश प्रस्तावों में से कई जमीन पर उतरने लगे हैं। इसकी शुरुआत मधुबनी, मोतिहारी और गोपालगंज से होने जा रही है। राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद (एसआईपीबी) ने इन तीनों जिलों में इथनॉल उत्पादन इकाई स्थापित किए जाने के तीन निवेश प्रस्तावों को स्टेज-1 क्लियरेंस दे दी है। इन तीन निवेश प्रस्तावों से बिहार में करीब 650 करोड़ का निवेश होने की उम्मीद है। वहीं रोजगार के तमाम नए अवसर भी सृजित होंगे।

इथनॉल उत्पादन पर राज्य सरकार का खास फोकस है। केंद्र द्वारा बिना चीनी के सीधे इथनॉल बनाए जाने संबंधी नियमों में बदलाव के बाद राज्य कैबिनेट ने नई इथनॉल उत्पादन प्रोत्साहन नीति को मंजूरी दी थी। इसकी पहल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2007 में ही तत्कालीन केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर की थी। बिहार अलग इथनॉल नीति लाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। बीते दिनों एक स्थानीय होटल में नई नीति को जारी करते हुए उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन ने बिहार को इथनॉल हब बनाने की बात कही थी।

मधुबनी के लोहट में लगेगी यूनिट
राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद ने जिन प्रस्तावों को पहले चरण की मंजूरी दी है, उसमें सबसे प्रमुख मिथिलांचल क्षेत्र के मधुबनी जिले का है। कभी चीनी उत्पादन के लिए पहचान रखने वाले मिथिलांचल में अब इथनॉल भी बनेगा। मधुबनी के लोहट में कभी चीनी मिल हुआ करती थी। अब वहां सोनासती ऑर्गेनिक्स द्वारा इथनॉल इकाई स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। कंपनी द्वारा यहां इथनॉल के अलावा चीनी और बिजली भी बनाई जाएगी। इसमें करीब 400 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।

गोपालगंज-मोतिहारी में होगा 250 करोड़ से अधिक निवेश
एसआईपीबी ने मोतिहारी और गोपालगंज में भी इथनॉल उत्पादन इकाइयों को स्टेज-1 क्लियरेंस दी है। इन इकाइयों में ढाई सौ करोड़ से अधिक का निवेश होगा। मोतिहारी में तिरहुत उद्योग प्राइवेट लिमिटेड ने 120 करोड़ की लागत से इथनॉल प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया है। जबकि गोपालगंज में भारत सुगर मिल भी इथनॉल उत्पादन शुरू करेगा। कंपनी ने 133 करोड़ का निवेश प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया है। उद्योग विभाग ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। इस यूनिट में प्रतिदिन 75 केएलपीडी (किलो लीटर पर डे) इथनॉल उत्पादन करने की योजना है। इससे बढ़ाकर 100 केएलपीडी किया जा सकता है।

जल्द मिलेंगी एनओसी और लाइसेंस
स्टेज-1 क्लियरेंस मिलने के बाद अब इन इकाइयों को विभिन्न विभागों मसलन श्रम, प्रदूषण नियंत्रण पर्षद, अग्निशमन आदि के एनओसी और लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा। इसके साथ बैंक लोन के लिए भी इकाइयां आवेदन करेंगी। उद्योग विभाग की मानें तो इथनॉल के प्राथमिकता सूची में शामिल होने के चलते तमाम लाइसेंस व अनापत्ति जल्द इन इकाइयों को मिल जाएंगी। उसके बाद स्टेज-2 यानि फाइनेंशियल क्लियरेंस के लिए आवेदन होगा। एसआईपीबी से उसकी अनुमति मिलते ही निवेशक कंपनियां राज्य सरकार से सब्सिडी व अन्य सुविधाएं पाने की अधिकारी हो जाएंगी।

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