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कोरोना विस्फोट: पटना एम्स में 384 डॉक्टर और स्वास्थकर्मी पॉजिटिव, मरीजों की बढ़ीं मुश्किलें

 


कोरोना संक्रमण की जद में बड़ी संख्या में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी आ रहे हैं। इससे पटना के बड़े अस्पतालों में जांच और इलाज प्रभावित हो रहा है। 90 फीसदी से ज्यादा स्टाफ के संक्रमित होने के बाद कई निजी कलीनिक और अस्पतालों का संचालन मुश्किल होने लगा है। कई बंद होने की कगार पर हैं।

संक्रमण की चपेट में आने के बाद ज्यादातर डॉक्टर होम क्वारंटाइन में रह रहे हैं। ऐसे में ऑक्सीजन और दवा के संकट से जूझ रहे राज्य के मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऑक्सीजन की कमी से निजी अस्पताल पहले ही मरीजों को भर्ती करने में आनाकानी कर रहे थे। अब कोविड के साथ अन्य गंभीर मरीजों के इलाज में भी मुश्किलें शुरू हो गई हैं।

किदवईपुरी स्थित एक प्राइवेट अस्पताल के मुख्य डॉक्टर समेत कई चिकित्सा कर्मी कोरोना वायरस से ग्रसित हो गए हैं, जिसके कारण अस्पताल की ओपीडी बंद कर दी गई हैं। फिलहाल यहां जो मरीज भर्ती हैं उन्हें भी धीरे-धीरे डिस्चार्ज किया जा रहा है। इसी प्रकार बसावन पार्क और बोरिंग रोड स्थित एक क्लीनिक को इसीलिए बंद कर दिया गया क्योंकि यहां के ज्यादातर कर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं। 

कंकड़बाग स्थित एक प्राइवेट नर्सिंग होम के तीन डॉक्टर संक्रमित होने के बाद अब केवल इमरजेंसी सेवा ही शुरू की गई है। सरकारी अस्पतालों के संचालन में भी मुश्किलें आ रही हैं। कोरोना की दूसरी लहर में पटना एम्स में कुल 384 डॉक्टर और स्टाफ संक्रमित हुए हैं। इसमें से कुछ लोग ठीक हो चुके हैं। वर्तमान में 134 स्टाफ और डॉक्टर संक्रमण की जद में हैं। इसमें 14 फैकल्टी, 30 रेजीडेंट और 90 स्टाफ शामिल हैं। इससे एम्स में ओपीडी और कोविड उपचार प्रभावित हो रहा है।

इसी तरह एनएमसीएच में डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मी मिलाकर चालीस से अधिक लोग संक्रमित हैं। ज्यादातर होम आइसोलेशन में हैं। अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी लैब में काम करनेवाले एक डॉक्टर समेत आधा दर्जन टेक्नीशियन व डाटा ऑपरेटर के संक्रमित होने से जांच प्रभावित हो रही है। ऐसी स्थिति में दिन की पाली में जांच बंद कर दी गयी है। बचे कर्मियों को रात्रि पाली में जांच के लिए लगाया गया है। आईजीआईएमएस में 22 डॉक्टर और 50 नर्सिंग स्टाफ सहित कुल संक्रमित है।

पीएमसीएच में प्राचार्य सहित 30 डॉक्टर और 49 स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित होने से जांच और इलाज प्रभावित हो गया है। इसी तरह पीएमसीएच परिसर स्थित आईजीआईसी में सोमवार को संस्थान में तैनात 8 डॉक्टर कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं। सभी होम क्वारंटाइन हो गए हैं। ऐसी स्थिति में इस अस्पताल की ओपीडी को भी संचालित करना मुश्किल हो गया है। यहां तैनात डॉक्टरों का कहना है कि धीरे-धीरे ज्यादातर लोग बीमारी की चपेट में आते जा रहे हैं ऐसी स्थिति में यहां काम करना मुश्किल हो गया है।

मुजफ्फरपुर, भागलपुर और गया में भी स्वास्थ्य सेवा ठप होने के कगार पर 
मुजफ्फरपुर स्थित एसकेएमसीएच समेत जिले के निजी और सरकारी अस्पतालों में 10 से 35 फीसद तक डॉक्टर और चिकित्सक कोरोना पॉजिटिव हो गए है। सबसे बदहाल स्थिति एसकेएमसीएच की है। यहां का प्रबंधन ने ओपीडी और सर्जरी सेवा को बंद करने का फैसला लिया है। एसकेएमसीएच अधीक्षक डॉ. बीएस झा ने इसको लेकर स्वास्थ्य मुख्यालय और डीएम को लिखित सूचना भेज दी है। भागलपुर के जेएलएनएमसीएच के 27 डॉक्टर समेत जिले में मंगलवार तक कुल 37 डॉक्टर अब तक कोरोना के शिकार हो चुके हैं।

जेएलएनएमसीएच में 14 पीजी व 13 फैक्लटी डॉक्टर कोरोना संक्रमित हो गए हैं। हटिया रोड तिलकामांझी स्थित आश्रय नर्सिंग होम के आठ स्टॉफ को कोरोना होने से यह भी बंद हो गया। सदर अस्पताल के दो डॉक्टर, नाथनगर समेत चार अस्पताल के प्रभारी समेत जिले के सात और डॉक्टर कोरोना संक्रमित पाये गये हैं। इसी तरह पूर्णिया में भी परेशाानी बढ़ी है। गया के मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सोमवार को कोरोना वार्ड के नोडल पदाधिकारी डा. एन के पासवान ही कोविड-19 संक्रमित हो गए। शेरघाटी अनुमंडलीय अस्पताल में करीब नौ स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हैं।

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