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Indian Railways: जानें- कब से शुरू होगा ट्रेनों का सामान्य परिचालन, खतरा अभी भी बरकरार

 


नई दिल्ली। कोरोना प्रकोप के साथ ही लागू देशव्यापी लाकडाउन के बाद ट्रेनों का संचालन ठप कर दिया गया था। जरूरत के हिसाब से समय-समय पर कुछ ट्रेनें विशेष तौर पर अवश्य चलाई गई हैं, लेकिन ट्रेनों का संचालन सामान्य होने में अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस बारे में बताया कि ट्रेनों का संचालन सामान्य करने का फैसला गृह मंत्रालय की अनुमति के बाद ही लिया जा सकेगा। कोरोना की आपदा के बाद वैसे भी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की गाइड लाइन लागू है।

अभी 75 फीसद एक्सप्रेस व मेल ट्रेनें चल रही

देश में फिलहाल मांग आधारित ट्रेनों का ही संचालन किया जा रहा है, जिसे आगे भी जारी रखा जाएगा। चलाई जा रही ट्रेनों में ज्यादातर एक्सप्रेस और मेल ट्रेनों को शामिल किया गया है। मंत्रालय का कहना है कि कुल 75 फीसद एक्सप्रेस व मेल ट्रेनें चला दी गई है, जबकि लोकल और उपनगरीय ट्रेनों का संचालन शत प्रतिशत कर दिया गया है। लेकिन चल रही ट्रेनों की संख्या कुल ट्रेनों के मुकाबले अब भी बहुत कम है।

ट्रेनों का संचालन जुलाई से सामान्य होने की संभावना

रेलवे का कामकाज सामान्य बनाने को लेकर तैयारियां जरूर कर ली गई हैं, लेकिन इसके लिए गृह मंत्रालय की अनुमति जरूरी है। रेलवे की तैयारियों को देखते हुए माना जा रहा था कि ट्रेनों का संचालन अप्रैल में नार्मल हो जाएगा, लेकिन अब ऐसा नहीं लगता है। रेलवे के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, ट्रेनों का संचालन जुलाई से सामान्य हो सकता है। लेकिन यह सब बहुत कुछ कोरोना पर नियंत्रण पाने पर निर्भर करेगा। हालांकि कोरोना टीकाकरण अभियान ने रफ्तार पकड़ ली है। रेलवे में भी स्वास्थ्य और रेलवे पुलिस बल को पहले चरण में टीका लगाया जा चुका है। इसके बाद के चरण में ट्रेन संचालन से जुड़े लोगों को टीका लगाया जा सकता है।

एनडीएमए की गाइड लाइन अभी भी लागू

देश में कोरोना की आपदा के बाद लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर एनडीएमए की गाइड लाइन जारी कर दी गई, जो अभी लागू है। उसी के बाद से ट्रेनों का संचालन पूरी तरह ठप कर दिया गया था। लेकिन जरूरत के हिसाब से कुछ ट्रेंनों को चलाने से पहले गृह मंत्रालय की अनुमति ली गई। रेल मंत्री गोयल ने बातचीत में कहा कि ट्रेनों को चलाने से पहले जिन राज्यों से होकर ट्रेनें गुजरती हैं, उनकी सहमति जरूर ली जाती है, ताकि कोरोना के प्रसार को रोकने में मदद मिल सके।

मांग आधारित ट्रेनें ही चलेंगी

सामान्य रेल संचालन से पहले इस बात पर विशेष ध्यान रखा जाएगा कि किन रूटों पर कितनी ट्रेनों की जरूरत है। यानी मांग आधारित ट्रेनें ही चलेंगी। यात्रियों की बढ़ती संख्या के हिसाब से ट्रेनों की संख्या भी क्लोन ट्रेन के रूप में बढ़ा दी जाती है। लेकिन जिन रूटों पर यात्रियों की संख्या नहीं है अथवा ट्रेनें खाली चलती हैं, उन पर ट्रेनों का संचालन फिलहाल नहीं किया जा रहा है।

स्पेशल ट्रेनों की रफ्तार लगभग दोगुनी

चलाई जा रही स्पेशल ट्रेनों की रफ्तार लगभग दोगुनी हो गई है। रेल सेवाओं को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। ट्रेनों की सेवाएं, सफाई, समय से ट्रेनों के छूटने और पहुंचने पर बल दिया गया है। कोविड-19 की आपदा से बचाव के हर निर्देश का पालन किया जा रहा है। रेलवे का दावा है कि सेवाओं में जबर्दस्त सुधार हुआ है। माल ढुलाई को बढ़ाकर भाड़े की आमदनी में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। रेलवे की कार्य प्रणाली को डिजिटल बनाने पर सबसे ज्यादा जोर है।

अभी सिर्फ कोरोना स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं

कोरोना की वजह से भारतीय रेल ने ट्रेनों का संचालन रोक दिया था। अब धीरे-धीरे ट्रेनों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है। अभी केवल कोरोना स्‍पेशल ट्रेनें ही चल रही हैं। अभी माना जा रहा है क‍ि मार्च में होली जैसा बड़ा त्योहार पड़ेगा, ऐसे में यात्र‍ियों की संख्‍या बढ़ेगी और ट्रेनों की मांग भी बढ़ेगी। अभी जो ट्रेनें चल रही हैं वो कोरोना स्‍पेशल ट्रेनें हैं, जिनका किराया भी ज्यादा है। इसके साथ ही कुछ जगहों पर रेलवे की ओर से मेमू, डेमू और अन्‍य लोकल पैसेंजर ट्रेनों का परि‍चालन स्पेशल ट्रेन के रूप में किया जा रहा है।


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