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गंगा पर दूसरी जीवन रेखा जेपी सेतु से बदल गई बिहार के कई जिलों की तस्वीर, नौकरीपेशा को राहत, व्यापार भी सुधरा

 


हाजीपुर-छपरा सड़क मार्ग का लालू प्रसाद यादव चौक। शनिवार की दोपहर दीघा पुल की ओर आने वाले वाहनों के लोग आसपास की दुकानों से कुछ खरीदारी कर रहे थे। आज से पांच साल पहले यहां इक्का-दुक्का ही दुकानें थीं। शाम ढलते विरानी पसर जाती थी, लेकिन दीघा सेतु ने इलाके की तस्वीर बदल दी। 

चौक से दीघा पुल की ओर आगे बढ़ने पर भरपुरा अंडरपास के पास अमरूद बेचते दर्जन भर ठेले वाले मिले। एक ठेला वाले को हर दिन पांच से छह सौ की कमाई हो जाती है। पहले उन्हें इसी पैसे के लिए दूर दराज के इलाकों में जाना पड़ता था। यहां से एक किमी की दूरी पर पहलेजा घाट में दीघा पुल का एप्रोच रोड है। यहां सड़क के किनारे सब्जी मंडी लगी है। पान की दो-चार गुमटियां हैं। समोसे और चाट की दुकानें भी सजी हैं। दो दर्जन से अधिक सब्जी वाले दोपहर से ही फल और सब्जियों की टोकरी लेकर बैठ जाते हैं। खरीदारों की संख्या इतनी की सड़क पर जाम की स्थिति बन जाती है। यह नजारा दीघा पुल के उत्तरी छोर के उन इलाकों का हैं जहां कभी सन्नाटा पसरा रहता था।  

आज इन इलाकों में कई छोटे -छोटे बाजार हैं। देर रात सड़कों पर रौनक रहती है। इलाके के लोगों की आय बढ़ी और व्यापार में मुनाफा बढ़ा है। सबसे अव्वल सुरक्षा बढ़ी है। दीघा ब्रिज स्टेशन और पाटलिपुत्र स्टेशन ने न केवल रेल को वैकल्पिक रास्ता दिया बल्कि पूरे इलाके की तस्वीर ही बदल दी। गंगा पार करने के लिए न तो लोगों को 20 से 25 किमी की दूरी तय करनी पड़ रही है और न ही जाम झेलना पड़ता है।   एक समय था जब गांधी सेतु पर जाम से वाहनों की आवाजाही घंटों थम जाती थी। लग्न के समय में बारात की गाड़ियां भी फंसती थी, विवाह का मुहूर्त पुल पर ही बीत जाता था। आज तस्वीर बदल गई है। अब वाहन सरपट दौड़ते हैं। जेपी सेतु के चालू होने के बाद न केवल छपरा बल्कि सीवान, गोपालगंज, वैशाली , मुजफ्फरपुर आदि कई जिलों का सड़क यातायात पटना से जुड़ गया।

नौकरीपेशा को भारी राहत, व्यापार भी सुधरा
पटना से मुजफ्फपुर, छपरा, हाजीपुर, वैशाली की ओर हर रोज हजारों लोग आवाजाही करते हैं। इनमें अधिकतर सरकारी व गैर सरकारी नौकरीपेशा के साथ व्यापारी वर्ग के भी हैं। वे हफ्ते भर काम के सिलसिले में राजधानी या हाजीपुर में किराए पर आवास लेकर रहते थे। जेपी सेतु बनने के बाद अब एक से दो घंटे में कार्यालय पहुंचकर ड्यूटी बजाने के बाद घर लौट आते हैं।

अपराध नियंत्रण हुआ कानून के राज में मदद
दियारा व हाजीपुर का इलाका वर्चस्व की लड़ाई से अक्सर रक्तरंजित होता रहा है। अपराधी राजधानी या इसके आसपास घटनाओं को अंजाम देकर गंगा के रास्ते भाग जाते थे। उन्हें पता होता था कि गांधी सेतु के जाम में फंसकर पुलिस बल लाचार होगा और वे आपराधिक कृत्य करते रहेंगे। जेपी सेतु ने कानून का राज स्थापित करने में भी मदद की। 

जमीन की कीमतों में उछाल से आर्थिक बदलाव आया
जेपी सेतु के बनते ही उत्तर के सैकड़ों गांवों की भौगोलिक व आर्थिक तस्वीर बदलने लगी। सेतु से नीचे उतरने पर सोनपुर-छपरा एनएच की दोनों ओर पटना व राज्य के अन्य भागों के साधन संपन्न लोगों ने जमीन खरीदनी शुरू की। आवासीय कालोनियां बनने लगीं।, मॉल-मार्ट खुलने लगे। निजी अस्पताल व नर्सिंग होम, बड़े-बड़े पब्लिक स्कूल आदि के लिए जमीन के लिए मची होड़ ने जमीन की कीमतों में उछाल ला दिया है। अभी हाल यह है कि जो जमीन सात साल पहले तक 25 से 50 हजार रुपये कट्ठा बिका करती थी, उसकी कीमत अब दस से पंद्रह लाख तक पहुंच गयी है।

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