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बिहार प्रदेश के अंदर डोमिसाइल नीति लागू हो और बंद उद्योग एवं छोटी-छोटी कुटीर उद्योग सरकार जल्द से जल्द शुरु करे :-अभिजीत सिंह



“बिहार प्रदेश के अंदर डोमिसाइल नीति को लागू करने की जरूरत आन पड़ी है 85% बिहारियों को सरकारी नीजी और गैर सरकारी संस्थानों में नौकरियां सुनिश्चित करें।“ 

यह व्यवस्था कोई नई नहीं है , कई राज्यों में ये व्यव्स्था पूर्व से लागू है । बिहार में जो बंद पड़े उद्योग हैं ,जो चीनी मिल है, जूट मिल है और जो भी छोटी-छोटी कुटीर उद्योग जैसे कि मेहसी की शिप की बटन फैक्ट्री, मोतिहारी चीनी मिल, रीगा चीनी मिल, कुमार बाग का स्टील प्लांट एवं ऐसे कई फैक्ट्रियां हैं जो बंद पड़ी हुई है । 

मैं आदरणीय उद्योग मंत्री श्री शाहनवाज हुसैन जी की इस बात से बिल्कुल इत्तेफाक नहीं रखता हूं, कि इथनॉल की फैक्ट्रियां आने से हमारे प्रदेश को कोई मुनाफा होने वाला है । 

जैसा कि उन्होंने कहा कि एक तरफ से हम मक्का डालेंगे दूसरी तरफ से डॉलर निकलेगा हम सबों को याद होगा कि कुछ दिन पूर्व इसी प्रकार की कुछ संज्ञा का उल्लेख  आदरणीय राहुल गांधी जी ने भी किया था । उस समय समूचा विपक्ष इसको बड़े ही गलत तरीके से लिया । पर आज जब एक एनडीए के एक मंत्री  ने उसी बात को कहा तो ख़ूब बाहबाही हो रही हैI

इथेनॉल की फैक्ट्री जो लगाने की बात हो रही है यह एक बहुत बड़ी साजिश है आजादी के बाद 33 चीनी मिल बिहार में हुआ करती थी आज स्थिति यह है कि केवल 11 चीनी मिल ही चल पा रही हैं उसमें भी 9 चीनी मिल जो की नीजी कंपनियों की है जिसमें की एक रीगा चीनी मिल भी है मैं आदरणीय मंत्री बिहार सरकार शाहनवाज हुसैन जी को यह याद दिलाना चाहता हूं कि रीगा का चीनी मिल इस साल सरकार और अधिकारीयों की नाकामियों के कारण बंद हो गया है, और उसने एक मांग  भी रखी कि मुझे इथेनॉल बनाने के लिए परमिशन दिया जाए और यह सरकार उसे रातों रात परमिशन दे भी देती परंतु जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मिलकर 

जब इसका विरोध करना शुरू किया तब जाकर इस पर रोक लगी है अगर शुगर मिल के मालिक केवल इथेनॉल बनाने के ऊपर ही जोड़ देंगे तो जो आज जो चीनी ₹38 की है वह आने वाले समय में ₹68 की हो जाएगी I एक जमाने में भारत में  63% चीनी बिहार से जाता था । और आज स्थिति यह है कि केवल 13% चीनी बिहार से जा रहा है । 

माननीय मंत्री शाहनवाज हुसैन जी ने कहा कि वह बड़ी-बड़ी कंपनियों से हजार-दो हजार करोड़ की लागत से नया उद्योग बिहार में स्थापित करवाएंगे I मेरा एक छोटा सा सवाल है उनसे कि बिहार में जो बिजली बिल है वह ₹8.22 पैसे (उद्योग केलिय) के दर से लिया जाता है और हमारे पड़ोस के राज्य चाहे वह छत्तीसगढ़ हो झारखंड हो बंगाल हो वहां ₹3.65 पैसे से ₹4.50 पैसे तक ही पर यूनिट बिजली बिल चार्ज किया जाता है ।आदरणीय उद्योग मंत्री जी आप हमें इतना समझा दे कि कोई भी उद्योग जो लगाने आता है आपके यहां वह आपको दुगुना रेट में बिजली बिल क्यों देगा। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि आने वाले समय में  बिहार में किसी प्रकार का कोई उद्योग नहीं आने वाला है ।

यह जो इथेनॉल की कहानी चल रही है यह बिहार मै वह केवल और केवल उन 09 चीनी मिल उद्योगपतियों को चोर रस्ते फायदा पहुंचाने की साजिश है । केंद्र हो चाहे राज्य हो  यह एनडीए की सरकार पूरी तरीके से व्यापारियों के हाथ की कठपुतली बनी हुई है । 

70 साल के अंदर ही देश बिल्कुल उलट हो गया जब हमारा देश आजाद हुआ था तो 562 रियासतों को मिलाकर हिंदुस्तान का गठन किया गया था। सारे रियासतों एवं उनकी संपत्ति को सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया गया और उसी संपत्ति से यह देश आगे बढ़ा। हमने उसके बाद बैंकों को सरकारी किया , एलआईसी को सरकारी किया , हर चीज को सरकार की भागीदारी में लेकर आए।  परंतु आज स्थिति उसके बिल्कुल विपरीत हो गई है, आज हर एक सरकारी संस्थान को घाटा में रखकर घाटा साबित कर दुबारा से उद्योगपतियों को दे दिया जा रहा है उसे बेच दिया जा रहा है । मुझे एक बात बिल्कुल समझ में नहीं आ रही है की जिस सरकार को हम देशवासियों ने चुन कर देश चलाने का मौका दिया था । क्या वह इतनी निकम्मी है, क्या वह इतनी नालायक है और  उद्योगपति और प्राइवेट कंपनी वाले इतने होशियार हो गए हैं कि घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों को जब वह खरीद लेंगे तो वह मुनाफा देगा । यह तो बड़ा ही विचित्र बात है ।आज देश में फिर से बड़े आंदोलन की जरूरत है परन्तु 100 दिन से ज्यादा हो चुके 300 से ज्यादा किसान मर चुके हैं पर आदरणीय प्रधानमंत्री या ये कहे डिजिटल प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी जी को इतना भी वक्त नहीं है कि वह किसानों से मिले उनकी बातों को सुने।  

मैं सरकार से पुनः मांग करता हूं की बिहार में 85 परसेंट हम बिहारियों का ही अधिकार हो चाहे वह सरकारी कंपनियां हो , प्राइवेट हो, ठेकेदारी हो उसमें पचासी परसेंट हमारे बिहार के लोगो को ही काम मिले । जल नल योजना को उठा लीजिए हैदराबाद की कंपनी काम कर रही है,  पटना में जितने भी फ्लाईओवर है वह बाहर की कंपनियां बना रही है, क्या हम बिहारियों में इतनी ताकत और इतनी सूझबूझ नहीं है ? हमारे बिहार के ही लोग बाहर जाकर पुल पुलिया का निर्माण कर रहे हैं। बाहर जाकर कारोबार कर रहे हैं लेकिन बिहार में मौका नहीं दिया जा रहा है । उनके पलायन के ऊपर कोई रोक टोक नहीं है । जो जा रहा है उसे जाने दो जितना चला जाएगा उतना अच्छा रहेगा। कम लोग रहेंगे हमारी सत्ता बरकरार रहेगी।यही सोच बन चुकी है सरकार की।

मैं पुनः सरकार से मांग करता हूं कि 85/15 का जो यह कानून है इसको अभिलंब इसी सदन की कार्रवाई में ले और एक बिल पास हो । और हम बिहार के लोगों को पचासी परसेंट का अधिकार सरकार दे। अगर सरकार आने वाले दिनों में 85 परसेंट बिहारियों का हक नहीं देगी, तो जन अधिकार पार्टी आने वाले समय में 85 परसेंट अधिकार के लिए युवाओं के लिए संघर्ष और आंदोलन करने के लिए बाध्य हो जाएगी और इसकी शुरुवात 23 मार्च –शहीद दिवस के दिन से हमारी पार्टी करेगी I

अभिजीत सिंह 

प्रदेश सचिव सह पूर्व प्रत्याशी ढाका विधानसभा जनअधिकार पार्टी  लोकतांत्रिक

teamabhijit

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