Breaking News

Bihar Crime: वाल्मीकिनगर में जमीन विवाद में छोटे भाई की पीटकर हत्या, पुलिस को ग्रामीणों ने बनाया बंधक, अधिकारियों को छोड़ बाइक पर बैठ भागे थानाध्यक्ष

 


बिहार के बेतिया जिले के वाल्मीकिनगर के लक्ष्मीपुर रमपुरवा हरिजन टोली में जमीन विवाद में बड़े भाई व परिजनों ने पीट-पीटकर भीखम राम (56) को बुरी तरह घायल कर दिया। इलाज के दौरान भीखम राम ने दम तोड़ दिया। घटना मंगलवार सुबह आठ बजे की है। सूचना पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। लेकिन घटना से आक्रोशित ग्रामीणों के तेवर देख वाल्मीकिनगर थानाध्यक्ष बाइक पर बैठकर वहां से भाग निकले। वहीं जमादार अकसूद आलम व अन्य पुलिस कर्मियों को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया। ग्रामीण बगहा एसपी को घटनास्थल पर बुलाने की मांग कर रहे थे। 

रामनगर एसडीपीओ अर्जुन लाल ने घटनास्थल पर पहुंच मामले की छानबीन की। उन्होंने बताया कि भीखम राम की हत्या में उनके बड़े भाई रामकिशुन राम समेत 15 लोगों को नामजद किया गया है। विष्णु कुमार तथा संजू देवी को बगहा से हिरासत में लिया गया है। थनाध्यक्ष द्वारा निर्माण कार्य करने की अनुमति दिए जाने के आरोप की निष्पक्ष जांच होगी। सत्यता पाए जाने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। 

पुलिस सूत्रों के अनुसार भीखम राम का अपने बड़े भाई रामकिशुन राम से जमीन का विवाद चल रहा था। मंगलवार की सुबह रामकिशुन राम अपने पुत्र नागेन्द्र राम व अन्य के साथ विवादित जमीन पर झोपड़ी खड़ी कर रहे थे। जानकारी होने पर भीखम राम उन्हें रोकने पहुंचे। तब दूसरे पक्ष के लोगों ने भीखम राम को लाठी से पीटना शुरू कर दिया। भीखम जख्मी होकर गिर गए। परिवार वालों ने ग्रामीणों के सहयोग से भीखम को वाल्मीकिनगर एपीएचसी पहुंचाया। वहां से डॉक्टर संजय कुमार सिंह ने प्राथमिक उपचार के बाद बगहा रेफर कर दिया। लगभग तीन घंटे बाद भीखम की मौत अस्पताल में हो गयी। 

मौत की खबर फैलते ही ग्रामीण आक्रोशित हो गए। उन्होंने पुलिस कर्मियों को बंधक बना लिया। बाद में इंस्पेक्टर अनिल कुमार सिन्हा, नौरंगिया थानाध्यक्ष विनय कुमार मिश्रा, लौकरिया थानाध्यक्ष राज कुमार, पूर्व मुखिया मो. कलाम, विशुनदेव राम ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर उन्हें समझाया कि पीड़ित पक्ष को न्याय मिलेगा। तब जाकर ग्रामीण शांत हुए। 

सोमवार सुबह भीखम राम ने पुलिस को दिया था आवेदन
लक्ष्मीपुर रमपुरवा हरिजन टोली में मंगलवार की दोपहर भीखम राम की मौत की खबर फैलते ही ग्रामीण आक्रोशित हो गए। ग्रामीणों का कहना था कि सोमवार की सुबह भीखम राम ने वाल्मीकिनगर थाने में आवेदन दिया था। लेकिन पुलिस ने आवेदन पर कोई निरोधात्मक कार्रवाई नहीं की। जिसके चलते विपक्षियों का मनोबल बढ़ गया। अगर पुलिस ने मौके पर पहुंच छानबीन की होती और दोनों पक्षों को हिदायत दी रहती कि निर्णय होने तक जमीन पर कोई निर्माण नहीं होगा तो ऐसी घटना नहीं घटती। भीखम राम की जान नहीं जाती।

रमपुरवा पंचायत के पूर्व मुखिया विशुनदेव राम ने कहा कि वे स्वयं भीखम के साथ थाना पर गए थे। लेकिन थानाध्यक्ष ने कार्रवाई नहीं की। उन्होंने भीखम के बड़े भाई रामकिशुन को कहा कि वह जमीन पर जाकर निर्माण कार्य कराए। निर्माण कार्य शुरू हुआ तो यह घटना घट गयी। थानाध्यक्ष अर्जुन कुमार ने विशुनदेव राम द्वारा लगाए गए आरोप को गलत करार दिया। उन्होंने कहा कि वे राजनीति कर रहे है। 

पुलिस के पहुंचते ही मारो-मारो कर दौड़े ग्रामीण
वाल्मीकिनगर पुलिस को भीखम राम की मौत की जानकारी मिली तो पुलिस की टीम सक्रिय हो गयी। थानाध्यक्ष अर्जुन कुमार पुलिस बल के साथ गांव में पहुंचे। वे जैसे ही विवादित जमीन के पास पहुंचे तो ग्रामीण मारो-मारो चिल्लाते हुए पुलिस की तरफ दौड़ पड़े। भीड़ में शामिल महिला-पुरुष व नौजवानों की संख्या व आक्रोश देख थानाध्यक्ष वहां से दौड़ते हुए भागने लगे। रास्ते में एक बाइक को रोक  वे उसपर बैठे और चले गए। लेकिन ग्रामीणों ने मौके पर मौजूद जमादार मकसूद आलम व पुलिस कर्मियों को बंधक बना लिया। थानाध्यक्ष अर्जुन कुमार ने पुलिस की लापरवाही को सिरे से खारिज किया। उन्होंने बताया कि भीखम राम व रामकिशुन राम के बीच पिछले 10 वर्षो से भूमि विवाद का मामला न्यायालय में चल रहा है। ऐसे में पुलिस उस जमीन पर कोई निर्णय नहीं ले सकती है। सोमवार की शाम शिकायत मिलने पर दोनों पक्षों को चेतावनी दी गयी थी कि वे लोग विवादित जमीन पर नहीं जाएंगे। कुछ असमाजिक तत्वों ने भोले-भाले ग्रामीणों को भड़का कर पुलिस पर हमला करवाने का प्रयास किया।

कोई टिप्पणी नहीं

बिहार खबर वेबसाइट पर कॉमेंट करने के लिए धन्यवाद।