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छपरा:- जिले में 31 मार्च तक पोषण पखवाड़ा का होगा आयोजन,पोषण के पांच सूत्रों से कुपोषण पर लगेगा लगाम



कुपोषित अति कुपोषित बच्चों की आंगनबाड़ी सेविका करेंगी पहचान

पोषण के पांच सूत्रों से कुपोषण पर लगेगी  लगाम

जिला एवं परियोजना स्तर पर पोषण परामर्श केंद्र की होगी स्थापना


छपरा,17 मार्च । जिले में पोषण अभियान के तहत 16 से 31 मार्च तक पोषण पखवाड़ा का आयोजन किया जाएगा। समुदाय स्तर पर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर आमजनों को कुपोषण के खिलाफ जागरूक किया जाएगा। इसको लेकर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा पत्र जारी कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया है। पत्र के आलोक में निदेशक, आईसीडीएस निदेशालय बिहार, पटना ने जिला प्रोग्राम पदाधिकारी को पत्र लिखकर पोषण पखवाड़ा आयोजित करने का निर्देश दिया है। पोषण पखवाड़ा को लेकर आयोजित की जाने वाली गतिविधियों का कैलेंडर विभाग के द्वारा जारी किया गया है। कैलेंडर के माध्यम से समुदाय स्तर पर गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। आईसीडीएस निदेशालय बिहार पटना के निदेशक ने निर्देश दिया है कि कैलेंडर के अनुसार गतिविधियों का सफलतापूर्वक आयोजन कराया जाना है। साथ ही गतिविधियों के पश्चात जन आंदोलन डैशबोर्ड पर प्रतिदिन प्रतिवेदन को अपलोड किया जाएगा। इस अभियान में सहयोगी संस्था केयर इंडिया, यूनिसेफ समेत अन्य संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा। 




पोषण पंचायत का होगा आयोजन:

आईसीडीएस की  जिला कार्यक्रम पदाधिकारी वंदना  पांडेय ने बताया कि पोषण अभियान के दौरान जिले में पोषण पंचायत का आयोजन कर पंचायती राज के प्रतिनिधियों के सहयोग से बच्चों में व्याप्त कुपोषण से बचाव एवं कुपोषण से होने वाली बीमारियों की  रोकथाम के बारे में जागरूक किया जाएगा। कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चों की पहचान कर पोषण वाटिका के तहत पोषण युक्त पौधा लगाए जाने के लिए जागरूक किया जाएगा। प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्रों पर सहजन, पपीता, अमरूद का पौधा रोपण किया जाना है। 


आईईसी गतिविधियों से बच्चों में सर्वांगीण विकास का होगा प्रयास:


घर-घर आंगनबाड़ी कार्यक्रम के अंतर्गत माताओं को नई पहल पाठ्यक्रम एवं कोविड-19 के दौरान भेजे गए कैलेंडर के सहयोग से 3 से 6 साल के बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के लिए बच्चों के सीखने में आधारभूत, भाषाई कौशल एवं संख्यात्मक योग्यता को बढ़ावा देने के लिए गतिविधियों का आयोजन आंगनबाड़ी केंद्रों पर किया जाएगा। प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के सहयोग से केंद्र पर नामांकित वैसे बच्चे जो 6 साल पूरे कर लिए हैं, जिनका नामांकन प्राथमिक विद्यालय में होना है एवं पोषक क्षेत्र के अन्य 6 साल पूर्ण कर लिए बच्चे के अभिभावकों के साथ बैठक कर पोषण के महत्व बच्चों के सर्वांगीण विकास के पोषण की भूमिका बच्चों के विद्यालय में नामांकन कराने के लिए  प्रेरित करना एवं उससे संबंधित जानकारी प्रदान की  जाएगी । 



स्वास्थ्य जीवन जीने के लिए सामान्य योगा अभ्यास:

पोषण पखवाड़ा के दौरान बच्चों, महिलाओं एवं समुदाय में रहने वाले लोगों को सामान्य योगाभ्यास के लिए जागरूक किया जाएगा। सूक्ष्मा योजना अनुसार वीएचएसएनडी दिवस के आयोजन में खासकर गर्भवती महिलाओं के  वजन का रिकॉर्ड किया जाएगा। जिस गर्भवती महिला  के  वजन में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो रही है, उन्हें वीएचएसएनडी में उत्तरोत्तर सेवा एवं परामर्श के लिए आने को  प्रेरित किया जाएगा। 



पोषण के पांच सूत्रों से कुपोषण पर लगेगी  लगाम:

गृह भ्रमण के दौरान पोषण के 5 सूत्र जैसे- प्रथम हजार दिन, एनीमिया प्रबंधन, डायरिया से बचाव, स्वच्छता, हाथों की सफाई एवं पौष्टिक आहार आदि के बारे में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं को जागरूक किया जाएगा तथा उचित सलाह दी  जाएगी । साथ ही प्रसव पूर्व एवं प्रसव पश्चात देखभाल जन्म से 3 वर्ष तक के बच्चों के ऊपरी आहार एवं स्तनपान पर परामर्श, व्यक्तिगत स्वच्छता, हाथों की सफाई, खानपान, आहार विविधता, विभिन्न खाद्य समूह पर परामर्श दी  जाएगी | 


टीबी चौपाल के माध्यम से किया जाएगा जागरूक:

समुदाय आधारित गतिविधियों के अंतर्गत बच्चों में यक्ष्मा (टीबी) पर जन जागरूकता के लिए छोटे-छोटे समूहों में चौपाल का आयोजन किया जाएगा। जिसमें टीबी के लक्षण, उपचार एवं बचाव के बारे में जानकारी दी  जाएगी । प्रत्येक लाभार्थी गर्भवती महिला एवं 6 वर्ष तक के शिशु का सिर्फ वजन लिया जाना एवं उन्हें आवश्यक परामर्श दिया जाएगा। 



जिला एवं परियोजना स्तर पर पोषण परामर्श केंद्र की होगी स्थापना:

सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा परियोजना प्रखंड कार्यालय परिसर में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी की देखरेख में एवं  जिला अस्पताल अथवा जिला समहारणालय कार्यालय परिसर में जिला प्रोग्राम पदाधिकारी की  देखरेख में पोषण परामर्श केंद्रों की स्थापना एवं पोषण परामर्श का संचालन साथ ही पोषण के पांच सूत्रों के अंतर्गत व्यवहार परिवर्तन से संबंधित परामर्श दिया जाएगा। सभी परियोजना मुख्यालय द्वारा स्थानीय स्तर से ई-रिक्शा का उपयोग कर पोषण संदेशों को समुदाय तक पहुंचाने के लिए जागरूकता रथ निकाला जाएगा।

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