Breaking News

मुजफ्फरपुर जिले के 163 वार्ड में नल का जल योजनाएं अभी तक अधूरी

 


मुजफ्फरपुर, । राज्य में पंचायत चुनाव की घोषणा कभी भी हो सकती है। इसके बावजूद कई जिलों में नल का जल योजनाओं की स्थिति बेहतर नहीं है। मधुबनी में सर्वाधिक योजनाएं अधूरी हैं। इसके बाद मुजफ्फरपुर का नाम है। वहीं उत्तर बिहार के जिलों से 14 हजार करोड़ रुपये का उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित है। मुजफ्फरपुर, मधुबनी और पूर्वी चंपारण में एक-एक हजार करोड़ का उपयोगिता प्रमाणपत्र पेंडिंग है। पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक में ये मामले सामने आने के बाद सभी मद का उपयोगिता प्रमाणपत्र प्राथमिकता के तौर पर भेजने को कहा गया है। साथ ही नल का जल की अपूर्ण योजनाओं का काम 15 मार्च तक पूरा करने को कहा गया है। इसके बाद भी योजना पूरी नहीं होती है तो संबंधित पदाधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मधुबनी के 626 वार्ड में नल-जल योजना अधूरी

 पंचायती राज विभाग के निदेशक विजय रंजन की समीक्षा में यह बात सामने आई कि मधुबनी में अब तक नल-जल योजना 626 वार्ड में लंबित है। वहीं मुजफ्फरपुर के 163, दरभंगा के 145, सारण के 108, गोपालगंज के 94, सिवान के 59 और समस्तीपुर के 41 वार्डों में योजनाएं अधूरी हैं।

शिकायतों के निवारण में भी उत्तर बिहार के जिले फिसड्डी

समीक्षा में शिकायतों के निवारण की स्थिति पर चिंता जताई गई। उत्तर बिहार के जिले की स्थिति इस मामले में भी खराब है। समस्तीपुर में 43, मुजफ्फरपुर 38, पश्चिम चंपारण में 32, पूर्वी चंपारण में 26, सारण में 21, गोपालगंज में 17 और दरभंगा में 12 मामले लंबित हैं। जिलों के पंचायती राज पदाधिकारी को कहा गया कि शिकायतों के निदान तक इसका निवारण नहीं होना समझा जाए। इसके अलावा पंचायत सरकार भवन का कार्य शुरू होने की स्थिति भी जिलों में बेहतर नहीं रही। पिछली दो वर्षों की योजना के ऑडिट कार्य के लिए चार्टर्ड एकाउंटेट फर्म का चयन नहीं किया गया है। इस बारे में भी रिपोर्ट मांगी गई है।


कोई टिप्पणी नहीं

बिहार खबर वेबसाइट पर कॉमेंट करने के लिए धन्यवाद।