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बिहार: अपराध करने वाले किशोरों का सहरसा बनेगा ठिकाना, इन 14 जिलों के बच्चे रखे जाएंगे


बिहार का सहरसा जिला अब कम उम्र में अपराध करने वाले लड़कों का सुरक्षित ठिकाना सहरसा बनेगा। दरअसल, पर्यवेक्षण गृह के तौर पर तैयार भवन को अब विभाग ने उत्तर बिहार के पहले सुरक्षित स्थान (प्लेस ऑफ सेफ्टी) के रूप में नोटिफिकेशन कर दिया है। उत्तर बिहार का पहला और सूबे का तीसरा प्लेस ऑफ सेफ्टी सहरसा शहर के पुलिस लाइन समीप संचालित होने लगा है।

मेस, चिकित्सालय, लाइब्रेरी, न्यायालय कक्ष की सुविधा
जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार शुक्ला, डीएम कौशल कुमार और एसपी लिपि सिंह ने शुक्रवार को फीता काटकर प्लेस ऑफ सेफ्टी का उदघाटन किया। उदघाटन के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि शुक्रवार से 16 से 18 साल के विधि विवादित बालकों को प्लेस ऑफ सेफ्टी में रखने के लिए संसाधन शुरू हो गया है। उदघाटन के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डीएम और एसपी ने पूरे भवन सहित परिसर का अवलोकन किया। बच्चों के रहने की जगह, कमरे, मेस, चिकित्सालय, लाइब्रेरी, न्यायालय कक्ष, कॉमन रूम, कार्यालय, पदाधिकारियों और कर्मियों के कक्ष का जायजा लिया।  

14 जिले के कम उम्र में अपराध के आरोपी बालकों को रखा जाएगा
प्लेस ऑफ सेफ्टी में सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, कटिहार, मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, शिवहर और सीतामढ़ी कुल 14 जिले के कम उम्र में अपराध के आरोपी बालकों को रखा जाएगा। समाज कल्याण विभाग पटना के डायरेक्टर(निदेशक) राजकुमार ने कहा कि सहरसा के प्लेस ऑफ सेफ्टी में उत्तर बिहार के सभी जिले के विधि विवादित 16 से 18 उम्र के बालकों को रखा जाएगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बालकों की सुनवाई होगी। बालकों(लड़कों) को संबंधित जिले जहां से आए वहां दर्ज केस की सुनवाई के लिए उपस्थापन(पेशी) को ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बिहार देश का पहला राज्य होगा जहां के प्लेस ऑफ सेफ्टी में रहकर लड़के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थापन की कार्रवाई पूरी कर पाएंगे। वीसी के जरिए सुनवाई होने का फायदा यह होगा कि उपस्थापन के लिए पुलिस बलों की सुरक्षा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और समय पर उपस्थापन हो जाएगा।

 50 विधि विवादित बालक रखे जाएंगे
उन्होंने कहा कि कम उम्र में अपराध करने वाले विधि विवादित बालकों को प्लेस ऑफ सेफ्टी में रखकर उनकी मनोदशा में सुधार लाया जाएगा। उन्हें विवादों से दूर रहकर सामान्य जीवन जीने की सलीका सिखाते हुए उस लायक बनाया जाएगा। सहरसा शहर के पुलिस लाइन समीप बनाए गए प्लेस ऑफ सेफ्टी में 16 से 18 साल वाले 50 विधि विवादित बालक रखे जाएंगे। उनकी देखभाल के लिए सुपरिटेंडेंट, दो हाउस फादर, एक काउंसेलर, सफाईकर्मियों की तैनाती रहेगी। निगरानी के लिए सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। गौरतलब रहे कि विवादित लड़के वे होंगे जिसने परिस्थितिवश किसी जघन्य वारदात(अपराध) को अंजाम दिया है। उम्र कम रहने के बावजूद दिमागी तौर पर वयस्क जैसी हरकत करता और जिसके ऊपर यौनाचार जैसे आरोप साबित हुआ हो। 
 
बेगूसराय सहित चार जिले में अगले दो माह में खुलेंगे पर्यवेक्षण गृह
बेगूसराय सहित सूबे के चार जिलों में अगले दो माह में पर्यवेक्षण गृह खोलने की विभाग की योजना है। डायरेक्टर ने कहा कि अगले दो माह में बेगूसराय, सिवान, रोहतास और बेतिया में पर्यवेक्षण गृह खोले जाएंगे। अधिक से अधिक ऑब्जरबेशन होम संचालित करने का उद्देश्य विवादित बालकों को नजदीक वाली जगहों पर रखकर उनकी देखभाल करना है। उनकी मनोदशा में सुधार के साथ शिक्षा उपलब्ध कराना है। 

निर्भया कांड के बाद प्लेस ऑफ सेफ्टी खोलने का निर्णय
दिल्ली के निर्भया कांड के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने जेजे एक्ट में संशोधन का बिल लाते सेक्शन 49 के तहत 16 से 18 साल की उम्र वाले विधि विवादित लड़कों को प्लेस ऑफ सेफ्टी में रखने की पेशकश की। वहीं 18 से 21 साल वाले को बाल सुधार गृह में रखने पर विचार हुआ।

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