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उत्कृष्ट कार्यकुशलता के बदौलत डीएमटी अलका ने लिखी बदलाव की कहानी




छह माह के प्रशिक्षण से डीएमटी बनी जीएनएम अलका कुमारी

अब अन्य जीएनएम को कर रही है प्रशिक्षित

अमानत ज्योति कार्यक्रम से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में हुआ सुधार

छपरा । समुदायस्तर तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचे इसके लिए विभाग प्रयासरत है। स्वास्थ्य संस्थानों के प्रसव कक्ष में कार्यरत नर्सों को अमनात ज्योति कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित किया जा रहा है।इस कार्यक्रम के तहत जिलास्तर पर जिला मेंटर ट्रेनी भी बनाया गया है। जो जीएनएम अमानत ज्योति कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित होकर डीएमटी बनी है. वह अब दूसरे जीएनएम या एएनएम को प्रशिक्षित कर उनके कार्य क्षमता में निखार ला रही है। उन्हीं में से एक है छपरा सदर अस्प्ताल के प्रसव कक्ष में कार्यरत जीएनएम अलका कुमारी। जो जिला मेंटर ट्रेनी बनकर अपने कार्यकुशलता के बदलौत  मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में काफी सकारात्मक बदलाव ला चुकी है।


जीएनएम अलका कुमारी को अमानत ज्योति कार्यक्रम के जिलास्तर रैंकिंग में सबसे उत्कृष्ट मार्क्स दिया गया है। अलका ने बताया अमानत ज्योति कार्यक्रम के तहत उन्हें 6 माह तक प्रशिक्षण दिया गया और समय-समय पर इसका मूल्यांकन भी किया गया। जिसमें उन्हें 145 अंक प्राप्त हुआ।  यह  अंक हासिल कर अलका कुमारी अब अमानत ज्योति कार्यक्रम के डीएमटी बन गयी है। 


नर्सो के कार्य क्षमता में हुई बढ़ोतरी:

डीएमटी अलका कुमारी समय-समय पर प्रसव कक्ष के अन्य नर्सों को प्रशिक्षण देती है। जिसमें जीएनएम नर्सों का प्रदर्शन के साथ स्किल डेवलपमेंट किया जाता है। सिमुलेशन ट्रेनिंग में उन्हें पीपीई डोनिंग एंड डोफिंग, हैंड वाशिंग, वाइटल मॉनिटर, बीपी- पल्स रेट, टेम्परेचर चेकिंग, ऑक्सीजन लगाना, इंजेक्शन लगाना, कैथेटर लगाना, ऑटो क्लेव लगाना, लेबर रूम व्यवस्थित करना एवं  मरीजों में होनी वाली जटिलताओं को पहचानने और उसे दूर करने के बारे में जानकारी देती है। साथ ही, उन्हें अस्पताल से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का प्रबंधन करने की भी जानकारी देती है।


जटिलताओं की पहचान अब हुई असान:

डीएमटी अलका कुमारी बताती है  प्रसव के दौरान आने वाली जटिलताओं को पूर्व ही समाप्त किया जा सकता है लेकिन इसके लिए उन जटिलताओं  की सही  समय पर पहचान जरूरी है। ओरिएंटेशन ट्रेनिंग प्राप्त जीएनएम नर्स सुरक्षित संस्थागत कराने में अहम भूमिका अदा करेगी। जीएनएम नर्सों को लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर से सबंधित सभी आवश्यक तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया जाता है। ताकि  वह  इन स्थानों पर मरीजों में होने वाली जटिलताएं पहचान कर, उसका  सही  समय पर समुचित इलाज कर सके। इस प्रशिक्षण के बाद मातृ-शिशु स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के साथ-साथ मातृ-शिशु मृत्यु दर को भी कम करने में मदद मिल रही है। 



अब बदल रही प्रसव कक्ष की तस्वीर:

अमानत ज्योति कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित डीएमटी अलका कुमारी प्रसव कक्ष में कार्यरत जीएनएम के कार्य क्षमता को सुदृढ कर प्रसव कक्ष के गुणवत्ता में सुधार ला चुकी है। पहले जिस जीएनएम को एक्लेमशिया, बर्थ-एक्सपेक्शिया, एचआरपी की पहचान में समस्या होती थी वह अब आसानी से पहचान कर लेती है। इससे रेफर होने के मामलों में कमी आयी है। इसके साथ पीएनसी के द्वारा महिलाओं को काउंसिलंग भी की जाती है।  गड़खा प्रखंड के बनवारी बसंत निवासी इन्दू देवी ने कहा  उनकी ननद  का  प्रसव सदर अस्पताल में हुआ। जांच में पता चला कि उसे एक्लेमशिया की शिकायत है। लेकिन यहां के नर्सों ने अपने कार्य क्षमता के बदौलत नार्मल प्रसव कराने में सफल रही है। अब जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित है।

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