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शिशुओं के सर्वांगिक विकास के लिए अनुपूरक आहार जरूरी




- 6 माह बाद से शिशुओं को दें अतिरिक्त ऊपरी आहार

- पर्याप्त ऊपरी आहार शिशुओं के शारीरिक व मानसिक विकास में सहायक

- - डीसी एवं एलएस ने क्षेत्र भ्रमण कर कार्यक्रम का लिया जायजा, दिए आवश्यक निर्देश

- जिले के सभी ऑगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यक्रम का हुआ आयोजन  

- आंगनवाड़ी सेविकाओं ने घर-घर जाकर छः महीने से ऊपर के सभी बच्चों का अन्नप्राशन कराया


किशनगंज , 19 फ़रवरी |

शिशुओं के सर्वांगीण विकास के लिए स्तनपान के साथ ही उन्हें बेहतर अतिरिक्त ऊपरी आहार का दिया जाना जरूरी होता है। शिशुओं को पहले छः महीने केवल माँ का दूध देना चाहिए लेकिन इसके बाद उन्हें माँ के दूध के साथ ही पर्याप्त मात्रा में ऊपरी आहार दिया जाना चाहिए। इससे शिशुओं के शारीरिक एवं मानसिक विकास में वृद्धि होती है। शिशुओं में कुपोषण की समस्या को कम करने के लिए सभी आंगनवाड़ी सेविका द्वारा हर महीने छः माह से ऊपर के शिशुओं को खीर खिलाकर अन्नप्राशन कराया जाता है। कोविड-19 के कारण आंगनवाड़ी केंद्र बन्द होने के कारण आंगनवाड़ी सेविकाओं ने घर-घर जाकर छः महीने से ऊपर के सभी बच्चों को अन्नप्राशन कराया और उनके परिवार को शिशु को ऊपरी आहार खिलाने की जानकारी दी।



छः माह बाद स्तनपान के साथ ही ऊपरी आहार भी जरूरी :

अन्नप्राशन दिवस पर राष्ट्रीय पोषण अभियान की जिला कार्यक्रम सहायक पूजा कुमारी के द्वारा ठाकुरगंज प्रखंड के भोग डाबर पंचायत वार्ड नम्बर 02 में आंगनबाड़ी केंद्र 68 संख्या का क्षेत्र निरीक्षण तथा आंगनबा ड़ी केंद्र संख्या 205 के क्षेत्रों का भ्रमण किया गया ।   इस दौरान पूजा कुमारी ने बताया कि छः महीने बाद से ही शिशुओं को स्तनपान कराने के साथ अतिरिक्त अनुपूरक आहार दिया जाना चाहिए। इस उम्र में शिशुओं का शारीरिक एवं मानसिक विकास तेजी से होता है| इसलिए इस दौरान शिशुओं को ज्यादा आहार की जरूरत होती है। इसे ध्यान में रखते हुए सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर महीने 19 तारीख को अन्नप्राशन दिवस के रूप में मनाया जाता है| जिसमें सेविकाएँ छः माह के शिशुओं को खीर खिलाकर उनका अन्नप्राशन करती हैं। इसके साथ ही अन्नप्राशन दिवस पर माता-पिता या परिजनों को सेविकाएँ शिशुओं को दिए जाने वाले अतिरिक्त आहार की जानकारी देती हैं । हर माह अन्नप्राशन दिवस सभी आंगनबाड़ी केंद्र पर आयोजित किया जाता है लेकिन वर्तमान में कोविड-19 संक्रमण के कारण सेविकाएँ घर-घर जाकर शिशुओं के अन्नप्राशन करा रही हैं  और उनके परिजनों को अतिरिक्त आहार की जानकारी दे रही हैं ।


घर के खाद्य पदार्थों से करें अनुपूरक आहार का निर्माण : 


अन्नप्राशन दिवस में राष्ट्रीय पोषण अभियान की जिला समन्यवक मंजूर आलम द्वारा कोचाधामन प्रखंड के क्षेत्रों का भ्रमण किया गया । न जिला समन्यवक मंजूर आलम ने बताया कि शिशु के लिए प्रारंभिक आहार तैयार करने के लिए घर में मौजूद मुख्य खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है। सूजी, गेहूं का आटा, चावल, रागा, बाजरा आदि की सहायता से पानी या दूध में मिलाकर दलिया बनायी  जा सकती  है । बच्चे की आहार में चीनी अथवा गुड को भी शामिल करना चाहिए क्योंकि उन्हें अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। 6 से 9 माह तक के बच्चों को गाढे एवं सुपाच्य दलिया खिलाना चाहिए। वसा की आपूर्ति के लिए आहार में छोटा चम्मच घी या तेल डालना चाहिये। दलिया के अलावा अंडा, मछली, फलों एवं सब्जियों जैसे संरक्षक आहार शिशुओं के विकास में सहायक होते हैं।

- अन्नप्राशन के साथ दो वर्षों तक स्तनपान भी जरूरी : -

जिला समन्वयक मंजूर आलम ने बताया कि  बच्चों को अन्नप्राशन के साथ कम से कम दो वर्षों तक स्तनपान भी  कराएँ  और छः माह तक सिर्फ स्तनपान ही कराएँ । तभी बच्चे के  स्वस्थ शरीर का निर्माण हो पाएगा। इसके अलावा  6 माह से ऊपर के बच्चों के अभिभावकों को बच्चों के लिए पूरक आहार की जरूरत के विषय में जानकारी दी गयी। 6 माह से 9 माह के शिशु को दिन भर में  200 ग्राम सुपाच्य मसला हुआ खाना, 9 से 12 माह में 300 ग्राम मसला हुआ ठोस खाना, 12 से 24 माह में 500 ग्राम तक खाना खिलाने की सलाह दी गयी। अभिभावकों को बच्चों के दैनिक आहार में हरी पत्तीदार सब्जी और पीले नारंगी फल को शामिल करने की बात बताई गयी। चावल, रोटी, दाल, हरी सब्जी, अंडा एवं अन्य खाद्य पदार्थों के  पोषक तत्वों के विषय में चर्चा कर अभिभावकों को इसके विषय में जागरूक किया गया।


शिशुओं के पोषाहार के लिए इन बातों का रखें ख्याल: 


6 माह बाद शिशुओं को स्तनपान के साथ ही अनुपूरक आहार दें।

स्तनपान के अतिरिक्त दिन में 5 से 6 बार शिशु को अतिरिक्त आहार सुपाच्य भोजन के रूप में दें।

शिशु को मल्टिंग आहार(अंकुरित साबुत आनाज या दाल को सुखाने के बाद पीसकर) देना चाहिए।

माल्टिंग से तैयार आहार से शिशुओं को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

शिशु द्वारा अनुपूरक आहार नहीं खाने की स्थिति में भी उन्हें थोडा-थोडा करके कई बार अतिरिक्त भोजन खिलाना चाहिए।

- इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :- 

- व्यक्तिगत स्वच्छता और दो गज की शारीरिक-दूरी का रखें ख्याल।

- बार-बार हाथ धोने की आदत डालें। 

- साबुन या अन्य अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएँ।

- मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।

- भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

- ऑख, नाक, मुँह को अनावश्यक छूने से बचें।

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