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छपरा -जिले में 7 से 13 मार्च विश्व ग्लूकोमा सप्ताह का होगा आयोजन

 


"द वर्ल्ड इज, ब्राइट सेव योर साइट" होगा इस वर्ष का थीम

जन-जागरूकता के लिए रैली व नुक्कड़ नाटक होगा आयोजन

स्वास्थ्य संस्थानों पर लगेगा चिकित्सीय शिविर


छपरा। विश्व ग्लूकोमा सप्ताह का आयोजन 7 से 13 मार्च तक जिले में किया जायेगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। इसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ हरीश चंद्र ओझा ने अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को पत्र भेजा और तैयारी करने का निर्देश दिया है| जिसमें कहा गया है कि विश्व ग्लूकोमा सप्ताह का आयोजन 7 से 13 मार्च तक किया जाएगा । इस वर्ष का विषय "द वर्ल्ड इज, ब्राइट सेव योर साइट" रखा गया है।  इस सप्ताह के  दौरान मुख्य रूप से जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा शिविर का आयोजन होगा तथा स्कूली बच्चों के द्वारा रैली निकाली जाएगी। वाक्थान किया जायेगा। इसके साथ सभी स्वास्थ्य संस्थानों पर बैनर-पोस्टर के माध्यम आमजनों को इसके बारे में जानकारी दी जायेगी। पूरे सप्ताह में कितने व्यक्तियों की जांच की गयी इसकी रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को उपलब्ध करायी  जायेगी। 



बचाव के लिए सतर्कता है जरूरी:

सिविल सर्जन डॉ. माधवेश्वर झा ने बताया कि  ग्लूकोमा स्थाई नेत्रहीनता के मुख्य कारणों में से एक अहम कारण है। इसलिए आंखों संबंधी कोई भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए।ग्लूकोमा को आम भाषा में काला मोतिया या समलबाई भी कहते हैं। यह रोग ऑप्टिक तंत्रिका में गंभीर एवं निरंतर क्षति करते हुए धीरे-धीरे दृष्टि को समाप्त कर देता है। यदि इस रोग का उपचार न किया जाए तो व्यक्ति अंधा भी हो सकता है। अन्य महत्वपूर्ण कारकों में से एक कारक आंखों के दबाव का बढ़ना है, लेकिन किसी व्यक्ति में आंख का सामान्य दबाव रहने पर भी मोतियबिंद विकसित हो सकता है।


क्यों होती है आंखों की बीमारी ग्लूकोमा :


इस बीमारी को समलबाइ या काला मोतियाबिंद के नाम से भी जाना जाता है। यह बीमारी ऑप्टिक नर्व की ऐसी बीमारी है,जिसमें ऑप्टिक नर्व आंख का प्रेशर बढ़ने से सूखने लगती है। सामान्यत: यह बीमारी आंखों के प्रेशर बढ़ने से होती है। लेकिन कुछ व्यक्तियों में आंख का प्रेशर सामान्य रहने पर भी यह बीमारी हो जाती है।

इस कारण से होता है यह रोग:

आंख में उच्च आंतरिक दबाव (इन्ट्राओक्यूलर प्रेशर)।

साठ वर्ष की उम्र से ऊपर।

पारिवारिक इतिहास।

कुछ निश्चित चिकित्सीय स्थितियां जैसे कि मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और सिकल सेल एनीमिया।

आंख की निश्चित स्थितियां जैसे कि मायोपिआ या दूर तक न देख सकना।

कुछ निश्चित प्रकार की नेत्र शल्य चिकित्सा।

लंबे समय के लिए काटिकास्टेरायड दवाएं जैसे कि विशेष रूप से आई ड्राप का उपयोग करना।

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