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नेपाल के रास्ते भारत आ रहा चीन का सर्जिकल सामान, बॉर्डर पर सख्ती के बावजूद धड़ल्ले से हो रही बिक्री



चीन के द्वारा नेपाल के रास्ते खुले बॉर्डर का फायदा उठाकर भारतीय क्षेत्रों में सर्जिकल सामान भेजा जा रहा है। कोविड-19 के बाद चीन निर्मित सर्जिकल सामान की मांग काफी बढ़ी है। मांग अधिक रहने का फायदा तस्कर उठा रहे हैं। सीमांचल के जिलों में इन दिनों चीन के सर्जिकल सामान की खूब बिक्री हो रही है।

 लोकल का दंभ भरने वाले कई कंपनियां चीन के बिना मोहर टैग और आवरण चढ़ा सर्जिकल सामान को मंगवाती है और फिर स्थानीय टैग मोहर और डिब्बे में पैककर उसे देसी कहकर बेच दिया जाता है। कई ऐसे भी थोक विक्रेता हैं जो अपने से भी पैकिंग कर सर्जिकल समान को इंडिया का निर्मित कह कर धड़ल्ले से बेच रहे हैं। इस तरह की सूचना मिलने के बाद एसएसबी के द्वारा सीमाई इलाकों पर चौकसी बढ़ा जरूर दी गई है। लेकिन खुली सीमा का ऐसे तस्करों के द्वारा खूब फायदा उठाया जा रहा है। यही वजह है कि तमाम कोशिशों के बावजूद इस तरह के गोरखधंधा करने वाले तस्करों की मनमानी दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। 

बताया जाता है कि सीमांचल के पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज के जिलों में चीनी सर्जिकल सामान की बिक्री प्रति माह 100 करोड़ से अधिक की होती है और 90 प्रतिशत निजी अस्पतालों में चीनी निर्मित सर्जिकल सामान का ही उपयोग किया जा रहा है। सर्जिकल सामान में मार्जिन अधिक होता है और इसमें कमीशन भारी मात्रा में खरीदने वाले को मिलता है। हालांकि सरकार के द्वारा ऐसे अवैध रूप से सामान की निगरानी को लेकर सीमा पर एसएसबी के जवानों के अलावा जोगबनी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट के समीप कस्टम की टीम को तैनात किया है। इसके बावजूद तस्कर इस तरह के सामान की तस्करी कर रहा है।

बिक्री अवैध : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉक्टर उमेश कुमार ने बताया कि चीन निर्मित सर्जिकल सामान की बिक्री अवैध है। इस तरह की सूचना मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। इस मामले को लेकर जल्द ही जांच पड़ताल भी की जाएगी। वहीं आईएमए पूर्णिया के अध्यक्ष डॉ मुकेश कुमार ने बताया कि चीन के सामान को रोकने की जिम्मेदारी सरकार की है। ग्राहक और दुकानदार को यदि चीन निर्मित सामान ही सस्ते दामों पर मिलेगा तो वह खरीदेंगे ही। चीन का सामान सस्ता होता है। इस वजह से लोग इसे लेने में ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे चीनी निर्मित सामान भारतीय क्षेत्र में प्रवेश नहीं करें ताकि सरकार को राजस्व का भी क्षति नहीं हो पाए। 

इन सामान की अधिक मांग
चीन निर्मित सर्जिकल समान में सेक्शन मशीन,  वजन मशीन,  बीपी मशीन, नेबुलाइजर, पल्स ऑक्सीमीटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, इलेक्ट्रॉनिक थर्मामीटर, जेल बोतल ,ऑटोमेटिक बेड और कई तरह के बैंडेज बांधने वाली पट्टी समेत कई अन्य सामानों की मांग काफी अधिक है। बताया जाता है कि तस्करी के द्वारा काफी सस्ते दामों पर मंगाया जाता है। उस पर टैग मोहर और नया आवरण लगाकर काफी ऊंचे दामों में बेच दिया जाता है। हालांकि ऊंचे दामों में बेचने के बावजूद भी यहां के बने इस तरह के सामान से कम कीमत में ही लोगों को मिल जाता है। यही वजह है कि लोगों का झुकाव चीन निर्मित सामानों की ओर अधिक हो रहा है। कस्टम अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि अक्सर अवैध रूप से आ रहे सामान के लेकर छापेमारी की जाती है। हाल के दिनों में कार्रवाई भी की गई है। 

कोविड के बाद बीपी व वैट मशीन की अधिक मांग
कोविड-19 के बाद से बीपी और वेट मशीन की मांग काफी बढ़ी है। काफी सस्ते दामों में उपलब्ध होने की वजह से अधिकांश लोग इसे खरीद ही लेते हैं। कई ऐसे लोग हैं जिनके घरों में एक से दो बीपी और वेट मशीन है। बताया जाता है कि चाइना निर्मित इस तरह के सामान जल्दी खराब भी हो जाते हैं। लेकिन सस्ता मिलने की वजह से लोग इसे खरीद रहे हैं। पूर्णिया अंचल के राज्य कर संयुक्त आयुक्त शंकर शर्मा ने बताया कि बिना जीएसटी के सामान लाने वालों के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। इसके लिए कस्टम भी निगरानी करती है। इस तरह के मामले में विभाग से आदेश लेकर जांच पड़ताल की जाएगी। 

मेक इन इंडिया की उड़ी धज्जियां
चाइना निर्मित सर्जिकल सामान में मेक इन इंडिया का टैग लगाकर लोग बेच रहे हैं। ऐसे में मेक इन इंडिया की प्रतिदिन ऐसे लोगों के द्वारा धज्जियां उड़ाई जाती है। जिसे कोई देखने वाला नहीं है। हालांकि इस तरह के लोग अक्सर रास्ते में किसी प्रशासन के द्वारा पकड़े जाने पर दवाई अथवा अन्य इमरजेंसी के सामान कह कर निकल बनते हैं। पुलिस के हत्थे भी नहीं चढ़ पाता है। 

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