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पूर्ण टीकाकरण के शत प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जिला एवं प्रखंड स्तर पर होगी सप्ताहिक बैठक

 



• प्रत्येक सोमवार को जिला स्तरीय सप्ताहिक समीक्षा बैठक का होगा आयोजन


• सिविल सर्जन की अध्यक्षता में होगी बैठक


छपरा:   स्वास्थ्य विभाग पूर्ण टीकाकरण के शत प्रतिशत आच्छादन लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कृत संकल्पित है। इसी क्रम में टीकाकरण का गुणवत्तापूर्ण आच्छादन को सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक सप्ताह सोमवार को जिला स्तर पर सप्ताहिक समीक्षा बैठक सिविल सर्जन की अध्यक्षता में तथा प्रत्येक मंगलवार को प्रखंड स्तरीय समीक्षा बैठक चिकित्सा पदाधिकारी की अध्यक्षता में की जाएगी। इसको लेकर अपर निदेशक (प्रतिरक्षण) सह राज्य प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ नरेंद्र कुमार सिन्हा ने पत्र जारी कर सभी सिविल सर्जन व जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी  को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किया है। जारी पत्र में बताया गया है कि प्रखंड व शहरी क्षेत्र से प्राप्त सप्ताहिक समीक्षा रिपोर्ट एवं जिला स्तर पदाधिकारी एवं सहयोगी संस्थानों के प्रतिनिधि द्वारा सत्र परीक्षण के आधार पर जिला स्तरीय साप्ताहिक समीक्षा की बैठक की जाएगी। जिला स्तरीय  एवं प्रखंड स्तरीय सप्ताहिक समीक्षा बैठक के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति से उपलब्ध कराए गए प्रपत्र एवं राज्य स्वास्थ्य समिति के पोर्टल पर संशोधन किया गया है,जिसे पत्र के साथ भी भेजा गया है। 



सिविल सर्जन की अध्यक्षता में होगी बैठक:


जारी पत्र में या निर्देश दिया गया है कि जिले में पूर्ण टीकाकरण के शत-प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रत्येक सोमवार को जिला स्तर पर सिविल सर्जन की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक की जाएगी। इसमें एसीएमओ, डीपीएम डीआईओ,  डीसीएम एसएमसी, एसएमओ वीसीसीएम समेत अन्य सहयोगी संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक के बाद इसकी रिपोर्ट राज्य स्वास्थ समिति के पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।



टीकाकरण से रोग प्रतिरोधक क्षमता  का होगा विकास:


जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अजय कुमार शर्मा ने बताया  जिस बच्चे का टीकाकरण नहीं हुआ हो वह अत्यधिक बीमार हो सकता है, स्थायी रुप से अक्षम, कुपोषित और उनकी जान के लिए खतरनाक भी हो सकता है। एक बच्चा जिसे इंजेक्शन या दवा पिलाई गई हो, टीकाकृत माना जाता है। टीके बीमारियों के खिलाफ बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। टीकाकरण तभी काम करता है, जब वह बीमारी के होने से पहले दिया गया हो। यहां तक कि गर्भावस्था से पहले या उसके दौरान टिटनेस का टीका न सिर्फ महिला, बल्कि उसके नवजात शिशु को उसके शुरुआती हफ्ते में टिटेनस से सुरक्षा प्रदान करता है। 




 जानलेवा बीमारियों से बचाता है टीकाकरण:


सीएस डॉ माधवेश्वर झा ने बताया  नवजात बच्चों का नियमित टीकाकरण कराने से उनका कई जानलेवा बीमारियों से बचाव होता है। इसमें पोलियो, टिटनेस, डिप्थीरिया (गला घोंटू), खसरा, परटुसिस (काली खांसी) और टीबी मुख्य हैं। इसके अलावा हेपेटाइटिस बी को भी नियमित टीकाकरण में शामिल किया गया है।



ये हैं जरूरी टीके:


•जन्म होते ही - ओरल पोलियो, हेपेटाइटिस बी, बीसीजी

•डेढ़ महीने बाद - ओरल पोलियो-1,  पेंटावेलेंट-1, एफआईपीवी-1, पीसीवी-1, रोटा-1


•ढाई महीने बाद - ओरल पोलियो-2, पेंटावेलेंट-2, रोटा-2

साढ़े तीन महीने बाद - ओरल पोलियो-3, पेंटावेलेंट-3, एफआईपीवी-2, रोटा-3, पीसीवी-2

नौ से 12 माह में - मीजल्स 1, मीजल्स रुबेला 1, जेई 1, पीसीवी-बूस्टर, विटामिन ए


•16 से 24 माह में:


 मीजल्स 2, मीजल्स रुबेला 2, जेई 2, बूस्टर डीपीटी, पोलियो बूस्टर, जेई 2


 ये भी हैं जरूरी:


5 से 6 साल में - डीपीटी बूस्टर 2

10 साल में - टिटनेस

15 साल में - टिटनेस

गर्भवती महिला को - टिटनेस 1 या टिटनेस बूस्टर

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