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केसरिया- रॉक स्टार की टीम ने की स्टेडियम की मांग




*कहा स्टेडियम नहीं तो वोट नहीं*


*सुविधाओं की आस में पिछड़ रही प्रतिभा*


  

 संवाददाता केसरिया संतोष ठाकुर की रिपोर्ट


केसरिया प्रखंड क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को नियमित अभ्यास की सुविधा नहीं होने से उनकी प्रतिभा कुंठित हो रही है।जिसको लेकर प्रखंड के सैकड़ों युवा खिलाड़ी खुर्रम खान के नेतृत्व में स्थानीय बौद्ध स्तूप परिसर के समीप रॉक स्टार क्रिकेट एकेडमी के बैनर तले स्टेडियम बनाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।तथा स्टेडियम नही तो वोट नही की नारेबाजी भी की।विदित हो कि वर्षों से नगर व प्रखंड क्षेत्र के खेल प्रेमी और खिलाड़ी नगर में एक सर्वसुविधायुक्त मैदान की मांग करते आ रहे हैं।लेकिन यह मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी है।गौरतलब हो कि अभ्यास के अभाव में प्रखंड स्तर के कई खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।  यहां बताते चलें कि विश्व के मानचित्र पर केसरिया को गौरववान्वित करने वाला स्थानीय बौद्ध स्तूप यहां स्थापित है।उत्तर बिहार के सुप्रसिद्ध केशरनाथ महादेव मंदिर सहित कई धार्मिक व पौराणिक स्थल केसरिया की धरती पर मौजूद हैं।लेकिन खिलाड़ियों के लिए एक स्टेडियम नही होने के कारण उनकी प्रतिभा कूंठीत हो रही है।केसरिया इतना गौरवशाली होने के बाद भी नगर में कोई स्टेडियम नहीं होने से सैकड़ों प्रतिभाओं का भविष्य अंधेरे में है।प्रखंड में कई प्रदेश स्तर के खिलाड़ी रहे हैं, अब ये वरिष्ठ खिलाड़ी भी स्टेडियम की मांग का भरपूर समर्थन कर रहे हैं। 


*स्थानीय जनप्रतिनिधियों की नहीं दिखी रुचि*  


केसरिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत  जिले का बड़ा क्षेत्र है, जहां से कई जनप्रतिनिधि विधायक, सांसद, सहित मंत्री तक बन चुके हैं, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधी ने आज तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। वहीं जनप्रतिनिधियों ने घोषणाएं तो खूब की हैं, लेकिन पूरी कराने के लिए गंभीर नहीं रहे। जिससे क्षेत्र भी विकास की बाट जोह रहा है।वहीं स्टेडियम नहीं होने से खिलाड़ियों की प्रेक्टिस नहीं हो पा रही है।जिसके कारण ग्रामीण युवा खेल कूद प्रतियोगिताओं में अधिकतर खिलाड़ी विकासखण्ड से जिला स्तर तक ही पहुंच पाते हैं। जिसकी वजह साफ है कि योजना के तहत ग्रामीण अंचलों में अब तक खेल मैदान नहीं बने हैं। जबकि योजनाओं के तहत गांव के खिलाडिय़ों को प्रोत्साहन देने खेल सामग्री उपलब्ध कराने, खेल मैदान बनाने का प्रावधान किया गया था। जिसके कारण कई खिलाड़ी आज भी अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। बाबजूद इसके खेल एवं युवा कल्याण विभाग को इस मिशन की जरा भी फिक्र नहीं है। ग्राम पंचायत स्तर से राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने वाले खिलाडिय़ों की संख्या पिछले सालों में अधिक नहीं है। जिसमें सबसे ज्यादा खिलाड़ी ऐथेलिटिक्स के शामिल हैं। इसके अलावा हॉकी और बास्केटवाल के है, जिनका जिला स्तर पर चयन किया गया लेकिन पर्याप्त अभ्यास नहीं होने और तकनीकी जानकारी के आभाव में पिछली बार जिला स्तरीय प्रतियोगिता तक  में चयन नहीं हो सका।इस संदर्भ मे खेल प्रेमी खुर्रम खान ने कहा कि खेल विभाग उदासीन रवैये ने खेल विभाग योजना में प्रदेश को मिलने वाले पैसों से सालाना हर जिले की दस प्रतिशत ग्राम पंचायतों, विकासखण्डों का चयन कर वहां खैल मैदान और खेल सामग्री उपलब्ध करवाने की जिम्मदारी खेल विभाग की है। जिससे ग्रामीण अंचलों की प्रतिभाओं को तरासकर सामने लाया जा सके।लेकिन ऐसा धरातल पर होते नही दिख रहा है।


*यहां बन सकते है स्टेडियम*


प्रखंड में ऐसे कई स्थान हैं, जहां पर शासकीय भूमि खाली पड़ी हुई है।और उस भूमि का कोई उपयोग नहीं किया जा रहा है। ऐसे में प्रखंड की प्रतिभाओं को संवारने के लिए स्टेडियम बनाकर शासकीय भूमि का उपयोग किया जा सकता है। जो स्तुप के समीप ही बहुत बड़े मैदान खाली पड़े है। जहां पर स्टेडियम निर्माण कराया जा सकता हा है। इस अवसर पर मो0 नजरुल,संजीत यादव, धिरज कश्यप,गुफरान खान उर्फ छोटे,जफर,जाहिद, सोनू हनी, जावेद,सदरुल,रोहित सहित कई खेल प्रेमियों ने बताया कि स्टेडियम नहीं होने से हम ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाडिय़ों को खेलों के लिए प्रेक्टिस करने के लिए यहां वहां भटकना पड़ता है। ऊबड़, खाबड़ जगहों पर वह अपनी प्रेक्टिस करते हैं। वही उन्होंने बताया की प्रखंड क्षेत्र के खिलाडिय़ों ने पूर्व में प्रदेश स्तर पर प्रतिनिधित्व किया है। लेकिन उन प्रतिभाओं को अभ्यास के अभाव में और आगे बढऩे का अवसर नहीं मिल सका। युवा खिलाडिय़ों के सामने भी यही परेशानी है।इस मौके पर रोहित कुमार, राशीद एकबाल,समीर खान,लती खान,अरमान हासमी,सोनू सिंह, विकास सोनू, आसीफ रेहान सहित सैकड़ों खेल प्रेमियों उपस्थित थे।

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