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युवाओं ने समझी अपनी जिम्मेदारी, ​लोगों को कर रहे हैं जागरूक

 


- कोविड-19 के दौर में जागरूकता के लिए सोशल मीडिया को बना रहे हैं हथियार

- लॉकडाउन-एक में जैसा समर्थन मिला, आज भी इसकी आवश्यकता बनी हुई है

- संक्रमण खत्म नहीं हुआ है, वैक्सीन पर काम जारी है इसलिए अभी सतर्क ही रहें  

- मास्क, शारीरिक दूरी, स्वच्छता और सैनिटाइजर ही है बचाव का एकमात्र रास्ता


पूणियॉं, 4 सितंबर


कोविड-19 के संक्रमण से आम लोगों की सुरक्षा के लिए जब देश में केंद्र सरकार द्वारा लॉकडाउन लगाया गया तो सबने इसे बड़ा और सार्थक कदम बताया। विशेषकर युवा वर्ग ने सरकार के इस फैसले को न केवल अपना पूरा समर्थन दिया, बल्कि हरेक रूप से इसकी महत्ता और जरूरत को प्रसारित करते हुए इसका पालन करने और करवाने में अहम भूमिका अदा की। अब जब देश की व्यवस्था को वापस पटरी पर लाने के लिए अनलॉक का दौर शुरू किया जा चुका है, साथ ही समाज को संक्रमण के प्रभाव से भी दूर रखना है तो इसमें भी युवाओं की भूमिका काफी अहम साबित हो रही है। यह वह दौर है जब लोग काम पर लौट रहे हैं। वाहनों का परिचालन शुरू हो चुका है। दफ्तर के साथ सड़क व बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है, तो निश्चत ही संक्रमण से बचाव के लिए सत​र्कता और सुरक्षा की जरूरत भी बढ़ गई है। हालांकि संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए अब सामाजिक स्तर पर भी सुरक्षा और जागरूकता पर बल दिया जाने लगा है, इसमें युवाओं की भागेदारी भी सबसे ज्यादा देखी जा रही है। हालांकि इसकी सफलता तभी संभव है जब युवा और समाज एक रूप से कार्य करेंगे। 


नियमों की अनदेखी सबसे बड़ी चुनौती:

संक्रमण के खतरे को देखते हुए युवाओं का एक वर्ग जागरूकता और सतर्कता को लेकर अभियान तो चला रहा है, लेकिन एक वर्ग ऐसा भी है जो इसे आज भी हल्के में ले रहा है। ये अक्सर बाजार और सड़कों पर समूह में निकल जा रहे हैं। गलियों और चौराहों में भी दोस्तों से वार्तालाप में व्यस्त दिखते हैं। इस दौरान न तो शारीरिक दूरी और न ही मास्क का ख्याल रखते हैं। वहीं छूट मिलने के बाद बाइक पर सवार होकर घूमने के ख्याल से निकल जा रहे हैं। ऐसे में पहले समूह वाले युवाओं की जिम्मेदारी बढ़ जाती है, क्योंकि युवा, युवा की ही सूनते हैं। एक-दूसरे की देखा देखी कार्य करते हैं। ऐसे में पहले वर्ग को आगे आकर इन्हें समझाना होगा। जब सामान वर्ग ग्रुप में वार्ता होती है, तो निश्चय ही एक साकारात्म बात निकल कर सामने आती है।


भीड़ में न जाएं, सोशल मीडिया और फोन का लें सहारा:

कोविड-19 के संक्रमण से बचाव का एकमात्र उपाय अभी शारीरिक दूरी, मास्क और स्वच्छता ही है। जो लोग इसे नहीं मान रहे हैं, उन्हें इसकी महत्ता बतानी होगी। समझाना होगा कि हरेक वर्ग के सहयोग से ही संक्रमण के बढ़ते प्रभाव पर रोक लगाना संभव है। यह जरूरी नहीं कि जहां लोग भीड़ लगाते हैं, या नियमों की अनदेखी करते हैं, उन्हें समझाने के लिए हम भी वहां पहुंच जाएं। इसके लिए सबसे अच्छा माध्यम और विकल्प फोन कॉल के साथ सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, वाट्सएप, ट्विटर, इंस्टाग्राम हो सकते हैं। इसके माध्यम से हम उन्हें उनकी गलती या असवाधानियों को बताकर जागरूक कर सकते हैं। उन्हें यह भी बता सकते हैं कि क्यों नहीं वे भीड़ लगाने की जगह संक्रमण खत्म होने तक सोशल मीडिया के माध्यम से ही वार्तालाप करें। इससे सुगम और क्या हो सकता ​है। इसमें न तो दूरी की बंदीश है और न ही मास्क आदी के अभाव में संक्रमण के प्रभाव में आने का खतरा।


नियमों का पालन करेंगे तो कोरोना पर विजय संभव है :

कसबा प्रखंड के युवा व्यवसायी आर्यन राज बताते हैं कि बाजार खुलने से लोगों को काफी राहत मिली है। अब दिनचर्या सामान्य रूप से चल रही है। लोग अपने कार्यों के लिए घरों से निकल रहे हैं। हालांकि संक्रमण का दौर खत्म नहीं हुआ है, रोजाना मामले बढ़ ही रहे हैं। ऐसे में हमें कहीं से भी अपनी जिम्मेदारी नहीं भूलनी चाहिए। जब भी घर से बाहर निकलें तो शारीरिक दूरी का पालन जरूर करें। मास्क का प्रयोग और स्वच्छता को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लें। खासकर व्यापार के क्षेत्र के साथ अन्य जगहों पर परचम लहराने वाले युवा आगे बढ़कर पहल करें और सजगता बरतते हुए लोगों को नियमों का पालन करने के लिए जागरूक करें। इससे निश्चय ही कोरोना पर विजय संभव है। 


सावधानी और सतर्कता बरतते हुए कार्य करें:

युवा व्यवसायी रजत मांझी कहते हैं कि कोविड-19 की रोकथाम के लिए सामाजिक सतर्कता, सुरक्षा और जागरूकता बेहद जरूरी है। युवाओं की भूमिका तो इसमें सबसे महत्वपूर्ण है। हालांकि लोग नियमों का सही से पालन करें इसके लिए युवाओं के साथ घर-परिवार के लोगों और समाज के बुद्धिजीवियों को आगे आना होगा। प्रशासन ने नियमों में छूट दी है तो जरूरत को देखते हुए। इसलिए इस दौरान ऐसा कार्य न करें की वापस पहले जैसी स्थिति हो जाए। लोग बाजार आएं, रोजमर्रा के काम करें, लेकिन सावधानी और सतर्कता बरतते हुए। हम सभी एक दूसरे के बारे में सोचकर चलेंगे तो निश्चय ही सबका भला होगा और समाज भी संक्रमण मुक्त रहेगा। 

 

यहां अभी सबसे ज्यादा जरूरत है सतर्कता बरतने की: 

- खाली हैं या काम नहीं हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि घूमने के ख्याल से निकल जाएं। ऐसा करते रहेंगे तो निश्चय ही सड़क व बाजार में भीड़ बढ़ेगी.

- संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं ऐसे में मोहल्लों-गलियों में समूह में बैठक करना या ताश आदि खेलकर संक्रमण को न्योता देने जैसा है.

- बाजार-दुकान में खरीदारी करने में ज्यादा समय लगाना, बाइक पर सवार होकर एक साथ दो-तीन लोगों के निकलने का यह सही वक्त नहीं है.

- बच्चों का समूह में क्रिकेट, फुटबॉल खेलने के लिए निकलने से अभी रो​कना होगा.

- ऐसे सभी कार्य जिससे शारीरिक दूरी व मास्क की व्यवस्था प्रभावित होती हो न करें.

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