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डीईसी व एल्बेंडाजोल की दवा खाने से सेहत पर नहीं पड़ता है कोई प्रभाव

 


समय रहते सही उपचार से बचा जा सकता है 


शत प्रतिशत लक्ष्य को पूरा करने में जुटी हुई हैं स्वास्थ्य विभाग


जिले में 28 सितंबर से चलाया जा रहा है एमडीए अभियान


पूर्णिया: 30 सितंबर

   

फाइलेरिया एक लाइलाज़ बीमारी हैं इसका कोई ईलाज नहीं हैं बल्कि समय रहते इसका सही उपचार किया जाए तो काफी हद तक इससे बचा जा सकता हैं. नहीं तो फ़िर आजीवन भर इसकी सजा भुगतने को तैयार रहना पड़ेगा. हालांकि शुरुआती दौर में समय रहते इसे रोका भी सकता है, लेकिन जड़ से इसे खत्म नहीं किया जा सकता हैं. परंतु जागरूकता के अभाव में तथा समाज में फैली कुछ भ्रांतियों के कारण कुछ लोग फाइलेरिया की दवा खाने से कतराते हैं। ज़िले के पूर्णिया ईस्ट प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत मंझोली गांव की आशा कार्यकर्ता कंचन देवी ने बताया कि प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत मंझोली गांव में लोगों ने खिलाई जाने वाली डीईसी व एल्बेंडाजोल की गोली खाने से इनकार कर दिया था। उन्होने बताया लोगों का कहना था कि दवा खाने से फाइलेरिया बीमारी ठीक नहीं होती हैं बल्कि पेट दर्द, सर दर्द सहित कई अन्य बीमारियों के होने का डर बना रहता था, जिस कारण हमलोग किसी भी तरह के वितरण वाली दवा खाने से परहेज़ करते थे. आशा कार्यकर्ता कंचन देवी ने बताया केयर इंडिया टीम के सहयोग और उन्हें स्थानीय होने का लाभ मिला और काफ़ी समझाने के बाद दवा खाने को राजी हुए.



डीईसी व एल्बेंडाजोल की दवा खाने से सेहत पर नहीं पड़ता है कोई प्रभाव: 

डीएमओ डॉ. आरपी मंडल ने बताया दवा का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। कुछ लोगों को दवा खाने से चक्कर आदि आने लगते हैं या कोई और समस्या होती है। इसका मतलब है कि उस व्यक्ति में माक्रोफाइलेरिया है। उन्हें दवा से परहेज नहीं करना चाहिए। यदि कोई समस्या होती है तो नजदीकी अस्पताल से संपर्क कर लें। संबंधित को तुरंत इलाज उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया अगर दो साल की उम्र पूरी करने के बाद पांच साल तक लगातार साल में एक बार फाइलेरिया की दवा का सेवन किया जाए तो व्यक्ति इस बीमारी से प्रतिरक्षित हो जाता है। 



लाइलाज़ बीमारी का दूसरा नाम हैं फाइलेरिया:

डीएमओ डॉ. आरपी मंडल ने बताया लाइलाज़ बीमारियों की श्रेणी में शामिल फाइलेरिया से ग्रसित लोगों को भयानक हाथी पांव जैसी बीमारी से बचाव के लिए डी.ई.सी/एल्बेंडाजोल की गोली 2 वर्ष से ऊपर के लोगों को खाना है. जिसमें एल्बेंडाजोल कि गोली को चबाकर खाना है. वहीं 2 वर्ष से 5 वर्ष के बच्चों को डीईसी की एक गोली, जबकिं 5 वर्ष से 14 वर्ष के लोगों को 2 गोली व उससे ऊपर उम्र के लोगों को 3 गोली खाना है. इसके साथ ही सभी लक्षित वर्ग को एल्बेंडाजोल की एक दवा चबाकर खानी है. सबसे खास बात यह हैं कि एमडीए अभियान में लगे टीम के सामने ही डीईसी व एल्बेंडाजोल की गोली खानी हैं. 02 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं व गंभीर रूप से ग्रसित व्यक्तियों को इस दवा का सेवन नहीं करना है. इस तरह की लाइलाज़ बीमारी से बचना हैं तो दवा खाना ही पड़ेगा क्योंकि अभी तक इसका स्थायी उपचार संभव नहीं हैं. 



शत प्रतिशत लक्ष्य को पूरा करने में जुटी हुई हैं स्वास्थ्य विभाग:

सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा ने बताया कि पूर्णिया जिले के सभी 14 प्रखंडों के 40 लाख 86 हजार 348 लोगों को आशा कार्यकर्ताओं के द्वारा घर-घर जाकर अपने सामने परिवार के सभी सदस्यों को डी.ई.सी व एल्बेंडाजोल की गोली खिलाना है, इसके लिए 1950 टीम के अलावे 3900 स्वास्थ्य कर्मियों को भी लगाया गया हैं, इनलोगों के द्वारा ज़िले के 1249 गांवों के ग्रामीणों को गोली खाने को दी जाएगी.


ज़िले के सभी प्रखंडों में डी.ई.सी (100मि.ग्रा.) की कुल 99 लाख 33 हजार एवं एल्बेंडाजोल की 39 लाख 73 हजार 200 गोलियां सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध करा दी गई है. शत प्रतिशत लक्ष्य को पूरा करने के लिए 195 सुपरवाइजर को लगाया गया है. जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित चलाये जा रहे कार्यक्रम से इसकी संख्या को कम करने और लोगों को इस बीमारी के लिए जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है. इस 14 दिवसीय अभियान का सभी जिलावासियों को लाभ उठाना चाहिए और फाईलेरिया को जड़ से खत्म करने में सहायक होना चाहिए.

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