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पहले बाढ़, फिर फसलों की बर्बादी, और अब सरकार से मुआवजा ना मिलना, आखिर किसानों की पीड़ा को सरकार क्यों नहीं समझती

 

 दरअसल हम बात कर रहे हैं पूर्वी चंपारण के पताही प्रखंड की 

 संवाददाता पताही 


 पताही प्रखंड के पूर्वी पंचायत, पताही  मैं पड़ने वाला गांव नंन्हाकार, बुराखाल , कोदरिया, मिर्जापुर, बेलाही राम, रामपुर मनोरथ जहां आई बाढ़ ने किसानों की फसलों को बर्बाद कर दिया, इस क्षेत्र में बाढ़ का पानी लगभग 1 महीने तक फसलों को खेत में डूबा कर रखा जिससे किसान भाइयों का खेत में लगाया गया सारा फसल पानी में ही सड़ गल गया, हालांकि किसानों को हालांकि किसानों को यह उम्मीद था कि सरकार उनकी फसल क्षति का मुआवजे के रूप में 6000 जरूर देगी मगर ब्लॉक के अधिकारियों के द्वारा इस गांव में हुए बाढ़ की वजह से किसानों के नुकसान को नजरअंदाज किया और इन्हें अभी तक फसल क्षति का पैसा नहीं मिल पाया, जिसके बाद किसानों का दर्द मीडिया के सामने छलक गया। बाढ़ के आने से पहले किसान लगभग अपने खेतों की रोपाई कर चुके थे वहीं उन्होंने 10 से ₹12000 खेत जुताई से लेकर बीज के बुवाई तक का बताया तो वहीं बाढ़ के बाद फसलों के नुकसान होने से बीज के दाम में बढ़ोतरी और गांव गांव भटक कर बीज की व्यवस्था करना इनके लिए मुसीबत बना रहा अगर इन्हें बीज से मिला तो इतना महंगा कि इनके लिए खरीदना आसान नहीं था किसानों का मानना था कि अगर सरकार मुआवजे के रूप में ₹6000 दे देती तो हम लोगों को एक हिम्मत सा मिल जाता।

 हालांकि जिस तरह से पूर्वी चंपारण जिले को बाढ़ ग्रस्त घोषित किया गया था उसके आधार पर पताही प्रखंड में पड़ने वाला पूर्वी पंचायत के, पताही  नन्हाकार ,  कोदरिया, मिर्जापुर, गांव में बाढ़ राहत कोष से पैसे मिलने चाहिए थे मगर यहां के ब्लॉक अधिकारियों के द्वारा जिस तरह से यहां के किसान के नुकसान को नजरअंदाज किया गया उससे तो यही लगता है कि आज भी किसानों के दर्द को सरकार कभी नहीं समझती, किसानों की बेबसी लाचारी का सिर्फ अधिकारी मजाक बना कर रख देते हैं जिससे हमारे किसान भाई अंदर से टूट जाते हैं और अब उनका मन भी किसानी करने में नहीं लगता, क्योंकि यह किसान दूसरे का पेट तो भर सकते हैं मगर इनका पेट भरने वाला कोई नहीं

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