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स्वतंत्रता सेनानी पंडित राजकुमार शुकला के गांव की सड़क की स्थिति बदहाल


संवाददाता। 
नरकटियागंज से मनोजकुमार मिश्र ।
 पश्चिम चम्पारण के नरकटियागंज अनुमंडल स्थित लौरिया प्रखंड का सतवरिया गांव, जिसे दुनिया चम्पारन सत्याग्रह के अनन्य योद्धा सेनानी पंडित राजकुमार शुक्ल के नाम से जानती है इन दिनो सतवरिया के ग्रामीण सड़क निर्माता संवेदक की लापरवाही का दंश झेलने को विवश हैं। जिसका जीती जागती तस्वीर दुनिया के सामने उजागर किया गया है। वही सतवरिया गांव है, जिस धरती ने पंडित राजकुमार शुक्ल को जन्म दिया। जिनके प्रयास से 31 अप्रैल 1917 में महात्मा गांधी को लौरिया प्रखंड के सतवरिया गांव में ठहरे। उनके गांव में विकास के नाम पर 25 मई 2017 तक उस गांव में एक पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो पाया। जिसको लेकर चंपारण सत्याग्रह शताताब्दी समारोह के अवसर पर बिहार सरकार के मुखिया के आदेश पर एक आम सभा का आयोजन कर सड़क निर्माण का निर्णय लिया गया। जिसमें तत्कालीन जिला पदाधिकारी लोकेश कुमार सिंह एवं ग्रामीण कार्य विभाग के सभी वरीय पदाधिकारी मौजूद रहे। जिसकी निविदा जनवरी 2020 में निकाली गई और संवेदक अवधेश शुक्ला को सड़क निर्माण कार्य की कार्यादेश विभाग ने दिया। विधायक विनय बिहारी ने फरवरी 2020 में सड़क का शिलान्यास किया गया, संवेदक को सतवरिया मिडिल स्कूल से सतवरिया नॉर्थ पर सड़क निर्माण कराना था, अलबत्ता उन्होने दूसरे सड़क पर निर्माण कार्य शुरू करवा दिया। जिसका विरोध ग्रामीणों ने किया, मगर संवेदक नहीं माना और निविदा में बताए गए सड़क के बदले बगल के सड़क का निर्माण कार्य शुरू करा दिया। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत जिला पदाधिकारी बेतिया,  बिहार सरकार के ग्रामीण मंत्री और ग्रामीण कार्य विभाग प्रमंडल मुजफरपुर को किया, तब आनन-फानन में सड़क पर मिट्टी भराई का कार्य कर काम को रोक दिया गया। जिसके चलते सड़क से होकर लगभग दर्जनों पंचायत के लोगों को आने जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सतवरिया के ग्रामीण वार्ड सदस्य ठगई राम, सरपंच पति धन्नजय दुबे,  अप्पू दुबे, नमी हजरा,  छठू दास, नागा राम, शिवचंद्र दास, भुखल राम, गोबिंद दास  एवं सामाजिक कार्यकर्ता मनीष दुबे बताते हैं कि लोगों के कई बार संवेदक को सतवरिया मिडिल स्कूल से सतवरिया नॉर्थ टोला 1.650 किलोमीटर स्वीकृत पत्र में ही सड़क का कार्य करावे, जब नहीं माने तो इसकी शिकायत लोगों ने उच्चाधिकारियो से कि जिस सड़क की निविदा ही नहीं हुई, तो फिर उस सड़क पर निर्माण कार्य कैसे किया गया। संवेदक की मनमानी की वज़ह से ग्रामीण काफी परेशान हैं, आनन-फानन में मुख्य सड़क में मिट्टी भराई का कार्य कर दिया गया। जिसके चलते बरसात में वर्षो होने से मार्ग कीचड़मय हो जाने से रास्ता अवरुद्ध हो गया है। आलम यह है कि गांव में अगर कोई बीमार हो जाए तो उसको कंधे पर या चारपाई के सहारे गांव से बाहर ले जाना पड़ रहा है।

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