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सचिन तेंदुलकर के खिलाफ विवादास्पद फैसले को लेकर खुद पर अभी भी बहुत गर्व करते हैं अंपायर डेरेल हार्पर




इंटरनैशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) के पूर्व अंपायर डेरेल हार्पर भारतीय क्रिकेट फैन्स में काफी चर्चित रहे हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने भारत के खिलाफ कुछ ऐसे फैसले दिए, जिसको लेकर भारतीय क्रिकेट फैन्स उन्हें कुछ खास पसंद नहीं करते हैं। 1999 में एडिलेड ओवल मैदान पर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट मैच खेला जा रहा था, जिसमें मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर दूसरी पारी में ग्लेन मैकग्रा की गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट दिए गए थे, हार्पर ने ही तेंदुलकर को आउट दिया था और इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ था। इस किस्से के करीब 21 साल बाद हार्पर ने कहा है कि वो उस फैसले को लेकर खुद पर बहुत गर्व महसूस करते हैं।
उस विकेट को लेकर इतना विवाद हुआ था और लोगों ने इसे एलबीडब्ल्यू की जगह 'शोल्डर बिफोर विकेट' नाम दिया था। मैकग्रा की गेंद पर तेंदुलकर ने डक किया था और मैकग्रा ने एलबीडब्ल्यू की अपील की थी, जिसके बाद हार्पर ने तेंदुलकर को आउट करार दिया था। मैच में यह भारत की दूसरी पारी थी और फिर भारत को उस मैच में हार का सामना करना पड़ा था। एशियानेट न्यूजेबल पर हार्पर ने कहा, 'मैं अपनी जिंदगी के हर दिन तेंदुलकर को आउट दिए गए उस फैसले के बारे में सोचता हूं। ऐसा कुछ नहीं था कि मुझे उसके बाद नींद नहीं आई थी, बुरे सपने आए थे या फिर वो रिप्ले हमेशा मेरे दिमाग में घूमता है। जब मैं अपने गैराज में जाता हूं तो सचिन और ग्लेन मैकग्रा की वो तस्वीर सामने आती है और मैं कुछ देर के लिए उस समय में चला जाता हूं जब गेंद तेंदुलकर को लगी थी।'
उन्होंने आगे कहा, 'आपकोय यह जानकर निराशा होगी कि आज भी मुझे उस फैसले पर बहुत गर्व है। क्योंकि मैंने अपने सामने हुई घटना पर बिना किसी डर या पक्षपात के नियम लगाया था।' हार्पर 2011 में उस समय भी विवाद में रहे थे, जब उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में डेब्यू कर रहे तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार को गेंदबाजी करने से बैन कर दिया था। प्रवीण को पिच पर डेंजर एरिया में दौड़ने के लिए यह सजा मिली थी।

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