Breaking News

मोतिहारी- महादेव की पूजा में होती है जलाभिषेक की प्रधानता


संवाददाता दीपू कुमार गीरी /रजनीश कुमार (मोतिहारी)



हिंदू धर्म में सावन माह में शिव की पूजा को विशेष महत्व दिया गया है।
बचपन से ही एक उत्सुकता बनी रही कि जब भी शिव की पूजा होती है उसमें जल की प्रधानता होती है ।जलाभिषेक के बाद शिव मंदिर की परिक्रमा का भी प्रावधान है जिस में शिव की अर्ध परिक्रमा की जाती है ।शिव की पूर्ण परिक्रमा का विधान नहीं है।
        पौराणिक मान्यता के अनुसार देवता और दानवों के द्वारा जब समुद्र मंथन किया गया तो उसमें से हलाहल विष कलश निकला। जगत कल्याण के लिए भगवान शिव ने उस विष का पान कर उसे अपने कंठ में समाहित कर लिया जिसके प्रभाव से उनका कंठ नीलवर्ण हो गया। विष के प्रभाव को शीतल करने हेतु उनपर देवी देवताओं द्वारा जलाभिषेक किया गया।
 यही कारण है कि कालांतर में भी शिव पर जल चढ़ाने को विशेष महत्व दिया गया है।
     शिव को अर्पित किया गया जल शिव के मस्तक को छूता हुआ बहता है अतः वह अत्यधिक पवित्र हो जाता है वह पवित्र जल हमारे पूर्ण परिक्रमा से लांघित ना  हो जाए इसलिए शिव की अर्ध परिक्रमा की जाती है।
        वही वैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि सभी द्वादश ज्योतिर्लिंगों पर सबसे ज्यादा रेडिएशन पाया जाता है।एक शिवलिंग एक न्यूक्लियर रिएक्टर्स की तरह रेडियो एक्टिव एनर्जी से परिपूर्ण होता है। यही कारण है कि इस प्रलयंकारी उर्जा को शांत रखने के लिए शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है क्योंकि शिवलिंग पर चढ़ा जल भी रिएक्टिव हो जाता है इसलिए जल को बहाने वाले मार्ग को लांघा नहीं जाता। वही शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ जल नदी के बहते पानी में मिलकर औषधि का रूप ले लेता है।
     पौराणिक मान्यता एवं वैज्ञानिक अध्ययन दोनों पर गौर करने के पश्चात यह स्पष्ट हो जाता है कि शिव पूजा में जलाभिषेक का  विशेष महत्व  क्यों है

कोई टिप्पणी नहीं

बिहार खबर वेबसाइट पर कॉमेंट करने के लिए धन्यवाद।