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टेक्सटाइल उद्योग का हाल, सरकार ने किया बेहाल : पुष्पम प्रिया चौधरी



पटना 28 जुलाई 2020 (प्रेस प्लुरल्स) बिहार सरकार ने प्रदेश के कपड़ा उधोग को मरणासन्न अवस्था में लाकर खड़ा कर दिया है. टेक्सटाइल उधोग की दुर्दशा ने बिहार में बहुत बड़ी संख्या में  लोगों के सामने आजीविका छीनकर उनका बुरा हाल कर दिया है.


बिहार में टेक्सटाइल उधोग के कई स्थानीय केंद्रों के निरीक्षण के बाद बिहार सरकार पर उनकी लापरवाही को लेकर प्लुरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी ने लिखा कि "पिछले 30 साल में बिहार ने अपने सौ वर्ष के सैंकड़ों उद्योग ही नहीं गँवाए हैं, बल्कि ग़्लोबेलाईजेशन के बाद आयी नई केंद्रीय योजनाओं का फ़ायदा लेने में भी यह एक असफल छात्र रहा है. 



 2005 में इंटेग्रेटेड टेक्स्टायल पार्क्स (SITP) की स्कीम आती है, देश भर में तेज राज्यों ने हज़ारों करोड़ के टर्नओवर और लाखों रोज़गार के साथ 75 से ज़्यादा पार्क्स डाल लिए हैं जिसमें ज़्यादातर बिहारी वर्कर ही काम करते हैं, और इधर बिहार शून्य! यार्न से लेकर गारमेंट प्रोडक्शन और प्रिंटिंग से लेकर स्टिचिंग तक के लिए बिहार में आदर्श माहौल है, बड़ा बाज़ार है और सस्ता श्रम है, लेकिन समस्या है कि पॉलिसी-मेकर्स भूसकोल हैं, खुद तो कुछ जानने का सवाल ही नहीं, तांक-झांक कर नक़ल भी करने की स्थिति में नहीं!" उन्होंने सरकार और प्रशासनिक अमले को को नकारा बताते हुए कहा कि वो भूसकोल हैं औऱ बताया कि आने वाले समय में "नई सिलेबस और नई रणनीति के साथ 2020-2030 में बिहार हर ज़िले के इंटेग्रेटेड पार्क्स यार्न मैन्युफ़ैक्चरिंग, क्लॉथ वीविंग, गारमेंट प्रोसेसिंग और स्टिचिंग की असेम्ब्ली लाइंस के साथ अपने बचे उद्योगों को नया जीवन, लाखों प्रवासी वर्कर को नए रोज़गार और देश के टेक्स्टायल एक्सपोर्ट को नई दिशा दिखाने को तैयार होंगे".

भागलपुर के हथकरघा उद्योग के बारे में लिखा कि "बियाडा की सफ़ेद हाथी ज़मीन पड़ी है, महिला सशक्तिकरण के कानफोड़ू दावे हैं और बेस्ट औद्योगिक नीति का दम्भ, लेकिन कुशासन के अंधकार और झूठे सुशासन के मायावी उजाले के बीच भागलपुर का सिल्क उद्योग फिर भी गर्व से दमकता है. चम्पानगर, भागलपुर के अत्यंत कठिन परिस्थिति में भी अदम्य जीवट वाली बेबी देवी जैसी युवतियों का शानदार काम 2020-30 के बिहार का भविष्य है".

मानपुर गया के बारे में बताया कि
" कभी मैनचेस्टर और कानपुर से तुलना होता मानपुर, गया का हैंडलूम-पावरलूम आधारित कपड़ा उद्योग बस गमछे और चादर की वीभिंग तक रह गया हज़ारों लूम्स और कारीगरों को तंग गलियों से निकालकर टेक्सटाईल पार्क्स में टेक्सटाईल इंडस्ट्री की बैकवर्ड (यार्न) और फॉरवर्ड (स्टिचिंग) इंटीग्रेशन से जोड़ना और ग्लोबल मार्केट लिंकेज देकर मानपुर जैसी महारत को बिहार में नई गति और नया पंख देना 2020-30 इंड्स्ट्रीयल पॉलिसी का मुख्य हिस्सा होगा. फिर देखते हैं 2020-30 में देश सूरत, भिवंडी और कोयम्बटूर का नाम सुनता है या मानपुर का"! 
 नवादा जिले के कादिरगंज के बारे में बताया कि  "घरों में तसर, मलबरी, मूंगा, कटिया रेशम की साड़ियों का असाधारण काम अब पूँजी के अभाव और तकनीकी कमी के कारण कराह रहा है. बिहार के हर ज़िले में इंडस्ट्रियस लोग हैं, हर क्षेत्र में एक स्मॉल इंडस्ट्री है, बस उन्हें सम्मान चाहिये ताकि वे नवादा जैसी जगहों को 2020-30 में प्रोडक्शन, इनोवेशन और इन्वेस्टमेंट का नया डेस्टिनेशन बना सकें".
पुष्पम प्रिया चौधरी ने बाँका के तेतरिया गाँव में सुषमा हेम्ब्रम के नेतृत्व में तसर रेशम कीट पालन करती संथाली महिलाएँ औऱ उनके जिजीविषा के बारे में कहा कि  "वे 16900 पौधों पर कीट पालन कर रही हैं अगर सरकारी सहायता मिलती तो कपड़ा उधोग को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते थे पर अफसोस यह है कि सरकार ने इसपर कोई ध्यान ही नहीं दिया".
सरकार ने टेक्सटाइल उधोग की उपेक्षा करके न केवल विकास को धीमा किया है बल्कि बड़ी जनसंख्या को भूखमरी के दर पर लाकर पलायन को विवश भी किया है.
प्लुरल्स की मुख्यमंत्री उम्मीदवार पुष्पम प्रिया चौधरी ने उद्योगों को नया जीवन देकर  लाखों प्रवासी कामगारों को नए रोज़गार देने का वादा किया. बिहार को देश के टेक्स्टायल एक्सपोर्ट को नई दिशा दिखाने वाला बनाने का वादा भी किया.

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