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पाकिस्तानी कीड़े टिड्डियों के गड़खा में हमला,सब्जी , मक्के , धान के बिचरे को जड़ से काट कर कर रही बर्बाद



गड़खा और अमनौर में धान के फसल को बर्बाद कर रही टिड्डियां,प्रशासन बोली किसानों से नही मिली सूचना
मुरारी स्वामी।गड़खा। लगातार बरसात होने के कारण जहां किसानों में इस वर्ष धान के फसल फसल लगने की उम्मीद जगी थी। वही धीरे धीरे पाकिस्तान से आई कीड़े टिड्डियां के आतंक से उम्मीदों पर पानी फिरने लगी हैं। गड़खा प्रखंड के मीरपुर जुआरा पंचायत,

टहलटोला,मठिया,पंचभिडिया,जिल्काबाद हसनपुरा पंचायत के जानकीनगर मजलिसपुर मीनापुर,कुचाव समेत विभिन्न गांव और अमनौर प्रखण्ड के रायपुरा,मदारपुर, परसा,कटसा समेत कई पंचायत में किसानों द्वारा धान का बीज लगाया गया परंतु धान के रोपनी से पहले ही धान के फसल पर पाकिस्तान से आई टिड्डियां (जिसे देहाती भाषा में राम जी का घोड़ा कहते हैं) फसल को बर्बाद कर रही है।मक्के, सब्जी और धान के पौधे को जड़ से ही काट कर खा जा रही हैं।किसानों को समझ नही आ रही कि क्या करें।बाजारों से किट नाशक दवा के छिड़काव करने के बाद भी कोई फायदा नही हो रही हैं। ज्यादातर यह कीड़े नहर व जंगल वाले खेतों में पाए जा रहे हैं। जैसे ही किसान खेत में जा रहे हैं तो टिड्डियां उड़कर भाग जा रही हैं।पुनः खेत में रुक जाती हैं।कुछ ही घण्टों में खेत के खेत फसल बर्बाद कर देती हैं। कई बार दवा छिड़काव के बाद भी कीड़ा से निजात नहीं मिला है। इसको लेकर लोग प्रशासन को भी सूचना दिए हैं परंतु प्रशासन के स्तर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

जागरूकता के अभाव में लोग समझ रहे साधारण कीड़ा
टिड्डियों का कहर इस कदर गड़खा प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में बढ़ रही है, कि रातों-रात धान के बिचरे को जड़ से चाट जा रही है, परंतु ग्रामीण उसे देहाती कीड़ा राम जी का सुग्गा समझकर छोड़ दें रहे है।जिला प्रशासन के निर्देश के बाद भी गड़खा और अमनौर प्रखण्ड में किसानों के बीच टिड्डियां से फसल को होने नुकसान और बचाव को लेकर अबतक जागरूकता अभियान नहीं चलाई गई है जिसके कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।


पहले कोरोना का कहर अब टिड्डियों का कोहराम
वैश्विक महामारी कोरोना से देश मे लॉक डाउन लग गई।किसानों को कटनी को मजदूर नही मिले।गेहूं की फसल पककर तैयार हुई थी। तभी बेमौसम लगातार बारिश होने गेहूं का फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया।कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों का कर्ज भी चुकता नहीं हुआ था।फिर भी बिना हिम्मत हारे किसानों ने किसी तरह साहूकार बैंक या कहीं अन्य से कर्ज लेकर लोग इस बार धान की फसल से उम्मीद लगाए बैठे थे,परंतु टिड्डियों के आतंक से यह फसल भी धीरे-धीरे बर्बाद हो रही है।

इस दवा से टिड्डियों से मिलेगी छुटकारा

इस संबंध में पूछे जाने पर अंचलाधिकारी मो इस्माइल ने बताया कि जिस पंचायत या गांव से सूचना मिलेगी एग्रीकल्चर विभाग द्वारा वहां जाकर समस्या का निदान कराया जाएगा। वही प्रखंड कृषि पदाधिकारी से पूछे जाने पर उन्होंने दवा छिड़काव हेतु बताया जिसमें लैम्बडासायहेलोश्रीन  एसीईसी की एक एमएल मात्रा प्रति लीटर पानी में छिड़काव या क्लोरपायरीफास 20 ईसी के 3 एमएल प्रति लीटर में छिड़काव करने से कुछ ही दिनों से टिड्डियों से छुटकारा मिलने की बात कही।

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