HAPPY NEW YEAR 2021

HAPPY NEW YEAR 2021

Breaking News

कोरोना लॉकडाउन: जिनके लिए कमाने निकले, वे ही घर पर दाने-दाने को मोहताज



बिहार: पिछले एक महीने से अधिक समय से कॉमर्स कॉलेज राहत शिविर में रह रहे शरणार्थी मजदूर घर जाना चाहते हैं। उनका कहना कि 14 दिन के बजाय एक महीने हो गए हैं, लेकिन पता नहीं सरकार और प्रशासन उन्हें घर क्यों नहीं भेज रहा है। इनका कहना है कि हम जिनके लिए कमाने घर से बाहर निकले थे, आज वे ही घर में रहकर दाने दाने को तरस रहे हैं। ऐसे में उनके कमाने का क्या फायदा। इसलिए अब तो यही इच्छा होती है कि किसी तरह घर भाग जाएं। लॉक डाउन ने हजारों मजदूरों के साथ कई आम लोगों के लिए विकट समस्या खड़ी कर दी है। ऐसी ही स्थिति पटना के कॉलेज ऑफ कॉमर्स ऑफ कॉमर्स में राहत शिविर में रह रहे लोगों की है। 
सुबह शाम खाना के साथ चाय भी 
यहां रुके लोगों को खाने-पीने की दिक्कत नहीं है। सुबह-शाम खाना के साथ चाय भी दी जा रही है। इसके अलावा मजदूरी करने वाले और रात में सड़क किनारे सोने वाले लोगों को इस केंद्र से बड़ी राहत मिली है। लॉक डाउन की वजह से सारे काम-धंधे बंद हो गए हैं। ऐसे में इन लोगों पर खाने का संकट आ गया, लेकिन भला हो आपदा प्रबंधन विभाग का, जिसने इस बात का नोटिस लिया और जिला प्रशासन को गरीब लोगों के आवास और भोजन का प्रबंधन करने को कहा। 
सताने लगी है घर-परिवार की चिंता
औरंगाबाद के संजय गुप्ता पटना में रहकर मजदूरी करते हैं। लॉक डाउन लगा तो घर जाने के लिए निकले और पहुंच गए कॉमर्स कॉलेज के राहत शिविर में। अब हर बीतते दिन के साथ उनकी मुश्किल बढ़ती जा रही है। उन्हें अपने घर-परिवार की चिंता सताने लगी है।  घर में अकेला कमाने वाला वे ही हैं। वे कहते हैं कि अब तो काम भी शुरू हो गया है, इसलिए यहां से जाने दिया जाए। 25 लोगों के बीच रह रहे सन्नी ने बताया कि पैसा भी खत्म हो गये हैं। अब घर जाने दिया जाए। लॉक डाउन के 17 मई तक बढ़ जाने से इनकी निराशा काफी बढ़ गई है।

कोई टिप्पणी नहीं

बिहार खबर वेबसाइट पर कॉमेंट करने के लिए धन्यवाद।