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बेतिया:- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से जिले के दो क्वारंटाइन सेंटरों का किया गया अवलोकन एवं निरीक्षण। क्वारंटाइन सेंटरों में रह रहे प्रवासियों से किये संवाद।


माननीय मुख्यमंत्री ने क्वारंटाइन कैम्प में कराये जा रहे स्कील मैपिंग और पेवर ब्लाॅक उत्पादन की सराहना की।

मुझे अपने जिले में काम मिल जाय तो जिंदगी भर यहीं पर करूंगा कार्य: प्रवासी श्रमिक।


बेतिया।आप कहां से आये हैं, क्या करते थे, कब आये हैं, क्वारंटाइन कैम्प में कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है। उक्त सवाल माननीय मुख्यमंत्री, बिहार, श्री नीतीश कुमार द्वारा उत्क्रमित मध्य विद्यालय, लक्ष्मीपुर रमपुरवा बगहा-02 में रह रहे प्रवासी श्रमिकों से पूछी गयी। श्रमिकों ने माननीय मुख्यमंत्री को बताया कि क्वारंटाइन सेंटर में उन्हें किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हो रही है। सारी बुनियादी सुविधाएं समय से मिल रही है। कैम्प के श्रमिकों ने बताया कि वे बाहर के राज्यों में पेंटिंग का कार्य करते थे। क्वारंटाइन कैम्प में आने के बाद सभी श्रमिकों ने मिलकर विद्यालय की सूरत ही बदल डाली है। पूरे विद्यालय की सुंदर पेंटिंग तथा परिसर में अवस्थित गार्डेंन को सुंदर एवं सुव्यवस्थित तरीके से सुसज्जित कर दिया गया है। इस पर  मुख्यमंत्री द्वारा काफी प्रसन्नता जाहिर की गयी तथा कहा गया कि आपलोग इत्मीनान से रहिए, आपलोगों को कोई भी दिक्कत नहीं होने दी जायेगी, सारी बेहतर सुविधाएं मुहैया करायी जायेगी। माननीय मुख्यमंत्री नेक संवाद, 1 अणे मार्ग, पटना से वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से जिले के क्वारंटाइन सेंटरों का अवलोकन एवं निरीक्षण कर रहे थे। इस दरम्यान उन्होंने क्वारंटाइन सेंटरों में रहने वाले प्रवासियों से संवाद भी स्थापित किया।
बाल सुधार गृह, आईटीआई के समीप अवस्थित प्रखंड क्वारंटाइन सेंटर में भी माननीय मुख्यमंत्री द्वारा प्रवासियों से संवाद किया गया। यहां पर रह रहे प्रवासियों से बारी-बारी से जानकारी प्राप्त की गयी। बाल सुधार गृह क्वारंटाइन कैम्प में रह रहे ट्रांसजेंडर प्रवासी रतन ने माननीय मुख्यमंत्री को बताया कि वह गाजियाबाद में नृत्य-संगीत का कार्य करते थे। लाॅकडाउन के क्रम में वह वापस आया और उसे यहां पर क्वारंटीन किया गया तथा यहां पर उसे सारी सुविधाएं मिल रही है। उसे सिलाई एवं मास्क बनाने की बेहतर प्रशिक्षण जिला प्रशासन द्वारा दिया गया है तथा वह मास्क बनाने में अपनी भमिका निभा रहे हैं तथा कमाई भी कर रहे हैं। प्रतिदिन 250 से 300 रूपये की कमाई हो रही है जो बहुत बड़ा सहारा बन गया है।
वहीं क्वारंटाइन कैम्प में रह रहे राजबली ने बताया कि वह बरनाला जिले में पेवर ब्लाॅक का निर्माण कर अपना जीविकोपार्जन कर रहे थे। यहां आने के बाद उन्हें क्वारंटिन में रखा गया। कैम्प में रहने के क्रम में जिलाधिकारी निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने हमलोगों से बात की और हमलोगों ने बताया कि पेवर ब्लाॅक का निर्माण करते हैं। इस पर जिला प्रशासन द्वारा पेवर ब्लाॅक बनाने का प्रशिक्षण दिया गया तथा पेवर ब्लाॅक के निर्माण में आवश्यक मशीने/सामग्री यथा-बाईब्रेटर मशीन, मिक्चर मशीन, बालू, गिट्टी, केमिकल, सांचा, रंग आदि उपलब्ध करायी गयी। प्रवासी श्रमिकों द्वारा बहुत ही कम समय पर अभी तक लगभग 7 हजार पेवर ब्लाॅक तैयार कर लिया गया है। मुख्यमंत्री द्वारा यह पूछने पर कि अगर उसे पेवर ब्लाॅक बनाने का कार्य मिल जाय तो वह बाहर जाकर काम करेगा या यही पर। इस पर राजबली ने कहा कि मुझे अगर यही पर कार्य मिल जाय तो मैं जिन्दगी भर इसी जिले में रहकर कार्य करूंगा, बाहर के राज्यों में काम करने हेतु कभी भी नहीं जाउंगा। मुख्यमंत्री ने क्वारंटाइन कैम्प में चल रहे पेवर ब्लाॅक के प्रशिक्षण एवं उत्पादन की पहल की काफी सराहना की और बताया कि जल-जीवन-हरियाली उमे तालाबों के चारों ओर पेवर्स लगाया जाना है और नाली-गली योजना में भी काफी आवश्यकता है। इसलिए इसका उत्पादन कर इसे उपलब्ध करायें। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री द्वारा क्वारंटाइन कैम्पों में दी जा रही अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की गयी। बाल सुधार गृह, आईटीआई के समीप बने क्वारंटाइन सेंटर में जिलाधिकारी, श्री कुंदन कुमार तथा अन्य जिलास्तरीय पदाधिकारी एवं बगहा-02 प्रखंड के लक्ष्मीपुर रमपुरवा क्वारंटाइन सेंटर में उप विकास आयुक्त रवीन्द्र नाथ प्रसाद सिंह वीडियो कांफ्रेंस में सम्मिलित हुए।

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