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बेतिया: बिना नम्बर की मोटरसाइकिल भी जब्त, पकड़े जाने के डर से हाॅकर फरार



बेतिया से संवाददाता घनश्याम की रिपोर्ट

खुलेआम बिकती है प्रतिबंधित गुटखा। 
बेतिया।  बिहार के मुखिया नीतीश कुमार ने राज्य में गुटखा और शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। परन्तु यह प्रतिबंध सड़े आम मजाक बनती दिखती है। गुटखा राज्यों के जिलों में प्रवेश करती है परन्तु इसकी कोई पुष्टि नहीं होती है परन्तु गुटखा हर दुकानों में बिकती है वो आपके खरीदने मात्र से ही पुष्टि हो जाती है। जबकि बिहार में गुटखा की ना ही बड़ी व लघु उधोग है फिर भी इस राज्य में इसकी उपलब्धता बनी रहती है। आपूर्तिकर्ता सरकारी तंत्र को धूल झोंक कर अपने मालों की सप्लाई किए रहते हैं हालांकि इसमें कुछ सरकारी तंत्र के हाथों से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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बुधवार को बेतिया जिला के कालीबाग ओपी क्षेत्र में संदेहास्पद तरीके से मोटरसाइकिल से जाते हुए दो संदिग्धों को ग्रामीणों ने रोका और इसकी सूचना पुलिस और मीडिया को दी। मौके पर जब मीडियाकर्मी पहुंचे और विडियो बनाना शुरू किया तो दो मोटरसाइकिल सवार भागने लगे और जैसे ही उनसे पूछ ताछ किया गया वो मोटरसाइकिल और एक बोरा प्रतिबंधित शुद्ध प्लस गुटखा छोड़कर भाग खड़े हुए। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने मोटरसाइकिल और बोरा को जब्त करते हुए बोरा को खोला। जिसमें शुद्ध प्लस प्रतिबंधित गुटखा से भरा पाया गया। जिसे कालीबाग ओपी थानाध्यक्ष मनीष कुमार ने उक्त मोटरसाइकिल और  गुटखा को जब्त कर थाना लेकर आएं।
सूत्रों के मुताबिक पता चला कि उक्त प्रतिबंधित गुटखा का कारोबारी कालीबाग ओपी निवासी कथित भाजपा नेता है जो अपने सफेद पोश की आड़ में और प्रशासनिक मिलीभगत से वृहत पैमाने से अपना कारोबार संचालित करते हैं।
यहीं नहीं यह भी पता चला कि उक्त प्रतिबंधित गुटखा का गोदाम कालीबाग ओपी क्षेत्र में ही है। और उक्त गुटखा की बिक्री अपने घर और उक्त गोदाम से सुबह 4 बजे से शुरू कर दी जाती है। दबी जुबान से यह भी पता चला कि पुलिस प्रशासन के सामने से ही ठेला व मोटरसाइकिल से प्रतिबंधित गुटखा निकल कर नगर के सभी गुटखा कारोबारियों तक पहुंचता है।
आज स्थिति है कि लाॅक डाउन में पान की दुकान बंद है परन्तु गुटखा प्रत्येक किराना और अन्य दुकानों में उपलब्ध है। जानकार सूत्रों के मुताबिक लाॅक डाउन के पहले 13000 की एक बोरा गुटखा बिक्री की जाती थी जो कि अब 45000 रूपया में एक बोरा बेची जा रही है। जिसका नतीजा 5 रूपया की गुटखा शहर में 15 रूपया और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 रूपया में बेची जा रही है। लोगों को खाने की दिक्कत है परन्तु गुटखा का तीन गुना दाम देने की पैसा उपलब्ध है।
विदित है कि पिछले सत्र मुख्य सचिव बिहार के अध्यक्षता में 5 जुलाई 2019 से कोई भी गुटखा और पान मसाला की बिक्री प्रतिबंधित है। और इसकी मंजूरी भी फूड सेफ्टी कमिश्नर, पटना ने भी इसे लागू करने का आदेश दिया था। मालूम हो कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 के तहत इसमें मैग्नीशियम कार्बोनेट की मात्रा पाई गई थी इसलिए जन स्वास्थ्य को देखते हुए बिहार सरकार ने इसे प्रतिबंधित किया है।
ऐसे में बिहार राज्य और उसके जिलों में गुटखा का कारोबार होना एक बहुत बड़ी रैकेट की ओर इशारा करता है जो कि इस पूरे खेल को खेल रहा है।

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