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बिहार: कोरोना के कहर के बीच डॉक्टर और स्वस्थ्यकर्मी अस्पतालों से हो जा रहे गायब



पटना:  स्वास्थ्य विभाग की लाख कोशिशों और कड़ाई के बावजूद राज्य के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों से डॉक्टर गायब हो जा रहे है। अब तो डॉक्टरों की देखा देखी स्वस्थ्यकर्मियों के भी गायब होने का मामला सामने आ रहा है। यह सिलसिला रुकने का नाम नही ले रहा है। यह हालत तब है जब स्वास्थ्य विभाग ने सभी कर्मियों की छुट्टी 30 अप्रैल तक के लिये रद्द कर दी है। सिर्फ अध्ययन अवकाश पर रहने वाले  और मातृत्व अवकाश को लेकर ही छुट्टी की मंजूरी दी गयी है।

पावापुरी स्थित आयुर्विज्ञान संस्थान में 73 कर्मी ड्यूटी से गायब पाए गए
स्वास्थ्य विभाग द्वारा 1 से 6 अप्रैल तक पावापुरी, नालंदा स्थित बर्द्धमान आयुर्विज्ञान संस्थान में कार्यरत डॉक्टरों एवं कर्मियों की उपस्थिति की जांच करायी गयी, जिसमें 73 डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी कार्यस्थल से गायब पाए गए। इनमें विभिन्न विभागों के डॉक्टर, प्रोफेसर, ट्यूटर, रेजिडेंट डॉक्टर, के अलावे वार्ड अटेंडेंट, क्लर्क और अन्य कर्मी शामिल है। स्वास्थ्य विभाग के अवर सचिव विवेकानंद ठाकुर ने सभी कर्मियों को नोटिस जारी किया है। विवेकानंद ठाकुर ने कहा कि इनके गायब रहने से वैश्विक महामारी कोरोना में सरकार द्वारा जनस्वास्थ्य हेतु किये जा रहे कार्यो में बाधा पहुचीं है। यह गंभीर अनुशासनहीनता, कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही एवमं स्वेच्छाचारिता का द्योतक है।
हाल ही में औचक जांच में 198 डॉक्टर अनुपस्थित पाए गए थे
हाल ही में स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के उपस्थिति की जांच कराई थी, जिसमें 198 डॉक्टर गायब पाए गए थे। इनमें 76 डॉक्टरों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था।

गौरतलब है कि डॉक्टरों के दो शीर्ष संगठन बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, बिहार ने स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार को हर संभव सहयोग का वायदा किया था। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के महासचिव डॉ रणजीत कुमार ने कहा कि हम डॉक्टर इस महामारी में सरकार के साथ हर स्थिति में खड़े है और रहेंगे। उन्होंने कुछ डॉक्टरों के अनुपस्थित रहने की प्रवृति पर एतराज किया। उन्होंने कहा कि जिलो में स्थित अस्पतालों में डॉक्टर मरीजो की सेवा में लगे हुए है।  वहीं, आइएमए, बिहार के अध्यक्ष डॉ विमल कारक ने कहा कि आइएमए कभी भी ड्यूटी से गायब रहने का समर्थन नही करता है। व्यक्तिगत किसी को परेशानी है या कोई डिमांड है तो वह राज्य सरकार के समक्ष रखी जाती है। काम नही कीजिये इसके हम हिमायती नही है।

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