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कोरोना से जंग: बिहार के ग्रामीण क्षेत्र में 18 लाख से अधिक परिवारों को मिलेगा रोजगार


बिहार: कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए जारी लॉकडाउन में मजदूर वर्ग के हितों की रक्षा के लिए प्रयासरत बिहार सरकार का प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई-ग्रामीण) एवं मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 23.73 आवास निमार्ण से चालू वित्त वर्ष के दौरान 18 लाख से अधिक परिवार को रोजगार देने का लक्ष्य है।
 ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने गुरुवार को यहां बताया कि वित्त वर्ष 2०16-17 से आरंभ पीएमएवाई (ग्रामीण) के तहत अब तक वित्त वर्ष 2०2०-21 सहित 32 लाख 97 हजार 271 आवासों के निमार्ण का लक्ष्य था, जिनमें से पीएमएवाई (ग्रामीण) के 946609 आवास का निमार्ण पूर्ण हो चुका है। शेष 23 लाख 73 हजार से अधिक लाभुकों के आवास निमार्ण में वित्त वर्ष 2०2०-21 में ग्रामीण परिवारों को 17 करोड़ 32 लाख से अधिक मानव दिवस का रोजगार सृजन होगा, जिससे 18 लाख से अधिक परिवार को रोजगार दिया जा सकेगा।
19 लाख 12 हजार परिवारों को प्रथम किस्त की सहायता राशि दी 
 कुमार ने बताया कि इस वर्ष प्राप्त लगभग 1० लाख से अधिक आवास के लक्ष्य को छोड़ दिया जाय तो इससे पूर्व प्राप्त 22 लाख 5० हजार से अधिक के विरुद्ध 19 लाख 12 हजार परिवारों को प्रथम किस्त की सहायता राशि दी जा चुकी है। इस वर्ष प्राप्त लक्ष्य के विरुद्ध निबंधन, स्वीकृति एवं सहायता राशि के तहत की जाने वाली कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। उन्होंने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में गृहविहीन परिवारों को पीएमएवाई (ग्रामीण) एवं मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के माध्यम से आवास निमार्ण के लिए सहायता राशि उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्रत्येक आवास के निमार्ण पर चरणबद्ध तरीके से निमार्ण स्तर के अनुरूप 9० से 95 दिनों की मजदूरी भी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) योजना से उपलब्ध करायी जाती है।
लाभुकों को तृतीय किस्त की राशि दी गयी है
मंत्री ने बताया कि आवास पूर्ण करने वाले 946,609 लाभार्थियों में से 923784 को तृतीय किस्त की राशि दी गयी है। इस तरह लगभग 23 हजार लाभुकों को आवास पूर्ण करने के बावजूद तृतीय किस्त की राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है। इस पर उन्होंने नाराजगी जतायी तथा शीघ्र ही सत्यापन कराकर इन लाभुकों को राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होने बताया कि इस प्रकार लगभग 75 करोड़ से अधिक की राशि उन ग्रामीण लाभार्थियों के खाते में शीघ्र अन्तरित हो जाएगी, जो कोरोना संकट की घड़ी में उनका आर्थिक संबल होगा। 
उग्रवाद प्रभावित जिलों में 95 मानव  दिवसों का रोजगार उपलब्ध होगा
कुमार ने बताया कि वित्त वर्ष 2०2०-21 में प्राप्त लक्ष्य एवं पूर्व  से प्राप्त लक्ष्यों के अनुरूप शत-प्रतिशत आवासों के निबंधन, स्वीकृति एवं  राशि जारी करने की कार्रवाई सख्ती से की जाएगी, जिससे पूर्व से लंबित एवं  निमार्णधीन आवासों सहित सभी आवासों के निमार्ण के क्रम में प्रति आवास  सामान्य जिलो में 9० मानव दिवस एवं उग्रवाद प्रभावित जिलों में 95 मानव  दिवसों का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे 17 करोड़ 92 लाख से अधिक मानव  दिवस के रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। वर्तमान में मनरेगा अभिसरण से प्रति  मानव दिवस 194 रुपये की दर से मजदूरी का भुगतान होने पर लाभुकों को प्रति  आवास 17 हजार रुपये से अधिक मजदूरी के रूप में सहयोग मिलेगा, जिससे कोरोना  महामारी की विपत्ति में उनके आर्थिक हितों की रक्षा होगी।
वर्ष भर में 100 मानव दिवस का  रोजगार उपलब्ध कराने की गारंटी 
मंत्री ने कहा, “बिहार में रोजगार के अवसर की कमी नहीं होने दी जाएगी। राज्य  में रह रहे या बिहार आने वाले फंसे मजदूरों के लिए मनरेगा के माध्यम से  ग्रामीण विकास विभाग रोजगार प्रदान करने का हर संभव प्रयास करेगा। साथ ही  प्रत्येक इच्छुक सदस्य को प्रति परिवार वर्ष भर में 1०० मानव दिवस का  रोजगार उपलब्ध कराने की गारंटी प्रदान करता हैं। इस वर्ष अकेले दोनों  प्रकार की आवास योजनाओं के पूर्ण कायार्न्वयान से 23 लाख 73 हजार लाभुक  परिवारों को पक्के आवास के साथ-साथ अपेक्षित कार्य दिवसों की मजदूरी भी दी  जाएगी।”         
 श्री कुमार ने कहा कि इसके अलावा जीविका के जरिये सतत जीविकोपार्जन योजना से  एवं राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम द्वारा लाखों ग्रामीण  युवाओं को प्रशिक्षित कर विभिन्न स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा एवं अन्य  संस्थानों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। रोजगार की इच्छा रखने  वाले सभी व्यक्तियों के लिए सरकार जल जीवन हरियाली योजना, पंचायती राज  विभाग द्वारा चलने वाली विभिन्न योजनाओं से भी करोड़ों मानव दिवसों के  रोजगार उपलब्ध कराने का इंतजाम कर रही है।

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