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शादियों के सीजन में लॉकडाउन ने थामा बैंड बाजे का कारोबार, भुखमरी के कगार पर पहुंचे लोग



पटना: लॉकडाउन की वजह से बैंड पार्टियों में काम करने वाले कलाकारों और बैंड मालिकों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। इसी सीजन से होने वाली कमाई से उनके सालभर का इंतजाम होता है, लेकिन लॉकडाउन से खाने के लाले पड़ गये हैं। पटना जिले में करीब 100 से ज्यादा छोटी- बड़ी बैंड पार्टियां हैं। प्रत्येक बैंड पार्टी में 10 से 20  कलाकार होते हैं। 
बैंड संचालकों और कलाकारों ने बताया कि अब सालभर के लिए व्यवस्था होना तो दूर, तत्काल खाने के लाले पड़ गए हैं। हमनें कर्ज लेकर इस सीजन की तैयारी की थी। लॉकडाउन की वजह से एक बैंड पार्टी को 20 से 25 लाख का रुपए का नुकसान हुआ है। कर्मचारियों और कलाकारों को कहां से वेतन देंगे समझ में नहीं आ पा रहा है। इस शादी के सीजन में सभी बैंड पार्टियों की जून से जुलाई तक की र्बुंकग थी, अब सबकुछ चौपट हो गया है। आगे भी जल्द हालात सुधरने की उम्मीद नहीं है। सभी बैंड कलाकारों और मालिकों ने प्रशासन से आर्थिक सहायता की मांग की है।
शादी का सीजन चला गया बेकार
पटनासिटी, करबिगहिया, फुलवारी, दानापुर में पटना के कई नामी बैंड बाजे वालों की दुकान हैं, जो आज लॉकडाउन की वजह से बंद हैं। महाराजा बैंड के इकबाल ने कहा कि ऐसा तो हमने पूरी जिंदगी में कभी नहीं देखा था। लग्न में कमाये पैसे से साल भर घर का खर्च चलता था, लेकिन आज बैंड पार्टियां चलाने वाले कंगाल हो गए हैं।
बैंड संचालकों ने सुनाई अपनी पीड़ा
लॉकडाउन के कारण व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गया है। शादियों की र्बुंकग कैंसिल होने से 20-25 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। बैंड पार्टी के संचालकों और कलाकारों को परेशानी हो रही है। इनके साथ जुड़े कारीगर व मजदूरों का हाल बेहाल है।
-इकबाल, बैंड संचालक, पटनासिटी
इस व्यवसाय के माध्यम से कई लोगों का गुजारा होता है। इसलिए बैंड पार्टी के संचालक, कारीगर व मजदूर शादी-विवाह के मौके का इंतजार करते हैं। लॉकडाउन की वजह से पूरा व्यवसाय ठप है। वहीं, आगे भी जल्द हालात सुधरने के संकेत नहीं है। हम पूरी कंगाल हो गये हैं।
-दीपू, बैंड संचालक, पटनासिटी
अप्रैल महीना तो समाप्त होने को है। मई की सभी र्बुंकग कैंसिल हो गई हैं। जून की र्बुंकग भी कैंसिल हा रही है। बैंड से जुड़े लोगों पर रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है। -खुर्शीद बैंड संचालक, फुलवारीशरीफ
लॉकडाउन होने से बैंड-बाजा का कारोबार से जुड़े लोगों के रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। शादी के सीजन की कमाई से पूरे साल भर का खर्चा चलता था। जिला प्रशासन की ओर से कारीगरों व मजदूरों को सहायता प्रदान करना चाहिए।
बैंड, पटनासिटी

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