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वरिष्ठ राजद नेता ने नियोजित शिक्षकों की हड़ताल पर शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र।




सारण से पनालाल कुमार की रिपोर्ट 
छपरा (सारण) राजद के वरिष्ठ नेता और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भावी एमएलसी प्रत्याशी प्रो.(डॉ.) लाल बाबू यादव ने नियोजित शिक्षकों की चल रही हड़ताल पर सूबे के शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा कि  राज्य के हड़ताली नियोजित शिक्षकों के हड़ताल का 2 महीने से ज्यादा वक्त गुजर गया है शिक्षकों ने अपने जिन मांगों के लिए यथा समान कार्य के लिए समान वेतन ,राज्य कर्मी का दर्जा तथा स्पष्ट सेवा शर्त के  मांग से सरकार भी पूर्व में सैद्धांतिक रूप से सहमत हो चुकी है ।शिक्षकों की मांगों को पटना उच्च न्यायालय ने भी अपने न्याय निर्णय में सही एवं न्यायोचित ठहराया था जिसे बाद में सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय जाकर  स्थगित करवा दिया था।इस तरह कभी भी बिहार सरकार ने शिक्षकों के मांगो के प्रति सकारात्मक रूख नहीं अपनाया अंततः आपने ‌लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए नियोजित शिक्षकों को बाध्य होकर हड़ताल का आह्वान करना पड़ा जिसके लिए सरकार ही दोषी है। इस बीच देश में कोरोना  महामारी के कारण एक अभूतपूर्व स्थिति उत्पन्न हो गई जिससे हड़ताल भी प्रभावित हो गया है। आज स्थिति  यह है कि राज्य के प्राथमिक से लेकर 12वीं तक की सभी कोटि के स्कूल बंद है मैट्रिक की परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का कार्य भी पूर्ण नहीं हो ‌सका है। इस तरह राज्य के प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा व्यवस्था विकट परिस्थिति में फस गई है जिससे छात्रों एवं अभिभावकों के समक्ष अपने पाल्यों के भविष्य के प्रति संकट उत्पन्न होता दिखाई पड़ रहा है।इस हड़ताल के कारण वेतन बंद होने से राज्य के साढे चार लाख शिक्षक और उनके परिवार के लगभग बीस लाख सदस्य भारी आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं। हड़ताल अवधि के दौरान आर्थिक तंगी एवं चिकित्सा में अर्थाभाव के कारण राज्य में लगभग 55 शिक्षक असमय काल कवलित हो चुके हैं तथापि राज्य सरकार असंवेदनशील बनी हुई है।
           आपने कई बार शिक्षकों के हड़ताल से वापस आने का अपील जारी किया है परंतु कुछ कतिपय तकनीकी कारणों से हड़ताल समाप्त नहीं हो पा रही है । सरकार का कहना है कि शिक्षक पहले हड़ताल समाप्त करें तत्पश्चात उनकी सभी मांगों पर विचार किया जाएगा परंतु हड़ताल अवधि के दौरान लगभग 25000 शिक्षकों पर दंडात्मक  एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है ऐसी परिस्थिति में जब तक राज्य सरकार दंडात्मक कार्रवाई की वापसी की घोषणा नहीं करती तब तक शिक्षक चाह कर भी हड़ताल से वापस आने पर सहमत नहीं हो सकते है। इस असमंजस की स्थिति में सरकार को हीं आगे आना होगा और सबसे पहले दंडात्मक कारवाईयों को वापस लेने का घोषणा करनी पड़ेगी और मांगों पर विचार करने के लिए कमेटी बनाई जा सकती है, यह दोनों ही कार्य राज्य सरकार द्वारा संपादित किए जाने हैं। मुझे ऐसा लगता है इन को संपादित करने में सरकार को कोई घाटा या कठिनाई नहीं होगी।
            अतः आपसे आग्रह है कि उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में सहनशीलता एवं सदासयता दिखाते हुए हड़ताली शिक्षकों के प्रतिनिधियों से वार्ता कर देश एवं राज्य हित में शीघ्रातिशीघ्र शीघ्र हड़ताल को समाप्त कराएं अन्यथा आने वाले समय में सरकार के समक्ष अनावश्यक रूप से भारी संकट उपस्थित हो जाएगा जिसका असर इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है।
 पत्र की प्रति मुख्यमंत्री, उपमुख्मंत्री और शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को भी ईमेल के मध्यम से प्रेषित की गई है।

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