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प्राइवेट डॉक्टरों को बिहार सरकार की चेतावनी, काम पर लौटें या कार्रवाई के लिए तैयार रहें



कोरोना वायरस के चलते देशभर में लागू लॉकडाउन 2 के दौरान गतिविधियों की छूट दिये जाने के बावजूद सोमवार को अपने प्राइवेट क्लीनिक या नर्सिंग होम नहीं खोलने वाले प्राइवेट डॉक्टरों को बिहार सरकार ने चेतावनी जारी की है। नीतीश सरकार ने प्राइवेट डॉक्टरों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे वैश्विक कोरोनवायरस महामारी के दौरान अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए अपने क्लीनिक खोलें या महामारी रोग अधिनियम के प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्राइवेट अस्पतालों से जनरल ओपीडी शुरू कर सामान्य रोगियों का इलाज करने का आग्रह किया है। इस संबंध में प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य संजय कुमार ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के बिहार इकाई के माध्यम से प्राइवेट डॉक्टरों से पेशेंट का इलाज करने या कार्रवाई का सामना करने को तैयार रहने की चेतावनी दी है।
इस संबंध में आईएमए-बिहार के सचिव डॉ सुनील कुमार ने कहा कि सरकार ने महामारी रोग अधिनियम के प्रावधानों को लागू करते हुए निजी स्वास्थ्य सुविधाओं को शुरू करने को कहा है, जिसमें विफल रहने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि रविवार शाम को राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कोरोना महामारी के दौरान बिहार में लोगों को स्वास्थ्य सेवा मुहैया करने को लेकर निजी स्वास्थ्य सेवा के अपने दायित्वों से पीछे हटने पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी।
इससे पहले रविवार की शाम प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य संजय कुमार ने एक "#BiFFightsCorona हैश टैग करते हुए ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने लिखा कि राज्य में निजी स्वास्थ्य क्षेत्र के लोगों को चिकित्सा सेवा के अपने  दायित्वों से पूरी तरह से पीछे गंभीर विषय है। निजी क्षेत्र में 22 हजार की तुलना में 48 हजार बेड हैं और OPD (आउटडोर रोगी विभाग) सेवा का लगभग 90% है। यदि कोविड -19 को भूल भी जाओ तो बिहार में सामान्य रोगियों के लिए नियमित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही हैं।

उन्होंने एक अन्य ट्वीट करते हुए कहा कि यह सार्वजनिक क्षेत्र है जो कोविड 19 के परीक्षण, रोकथाम और उपचार में सबसे आगे है। यह भविष्य के लिए क्या दर्शाता है? लाभ का बँटवारा - हाँ - लेकिन निजी स्वास्थ्य सेवा के रिस्क उठाने की क्षमता के बारे में क्या कहना है और स्वास्थ्य बीमा कहां जाता है?
आईएमए-बिहार ने जताई सहमति
इस संबंध में डॉ सुनील कुमार ने सहमति जताते हुए कि मैं मानता हूं कि बिहार में निजी क्षेत्र के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाएं लकवाग्रस्त हैं। हालांकि हम बार-बार अपने सदस्यों से ओपीडी और पूर्ण आपातकालीन सेवाओं को शुरू करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन कोरोनोवायरस के कहर की वजह से वे भी डरे हुए हैं और घरों में बैठे हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि, यह एक सच्चाई है कि राज्य में निजी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं लेकिन अब भी कुछ डॉक्टर अपने क्लीनिक में जा रहे हैं और रोगी की जांच कर रहे हैं, जिसकी तस्वीरें मैंने प्रमुख सचिव के साथ साझा भी की हैं। उन्होंने कहा कि आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी देश भर के डॉक्टरों से कोरोना संकट के दौरान अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील कर रहे हैं।

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