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कॉल सेंटर पर आ रहे अजब-गजब फोन, कोई बुखार का पूछ रहा है इलाज तो किसी को खांसी ने कर रखा है परेशान


पटना:-सिविल सर्जन के मोबाइल की घंटी बजी और फोन उठाया और हेलो बोलते ही सामने वाला बोलता है कि मेरा कोरोना जांच करा दीजिए। सिविल सर्जन नाम और पता पूछने के बाद जब परेशानी पूछी तो बताया कि सर्दी हो रही है और शरीर में दर्द हो रहा है। सिविल सर्जन को दी गई जानकारी में कोरोना वायरस से संक्रमित होने का कोई लक्षण नहीं मिला। सिविल सर्जन ने जांच की आवश्यकता नहीं होने की बात कही तो संबंधित व्यक्ति आग बबूला हो गया। यह इकलौता मामला नहीं है, हर दिन ऐसे दर्जनों मामले कॉल  सेंटर और अधिकारियों के मोबाइल नंबरों पर आ रहे हैं।
लोगों में जागरूकता का है अभाव
आम लोगों में कोरोना को लेकर जागरूकता का अभाव है। सरकार की तरफ से इतना प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी कोई असर नहीं पड़ रहा है। आलम  यह है कि सामान्य फ्लू में भी लोग परेशान हो जा रहे हैं। वह कोरोना से इतना डर गए है कि सामान्य रूप से शरीर में हरारत भी हो रही है तो उन्हें कोरोना का लक्षण दिखने लग रहा है। ऐसी स्थित में लोग सीधा अधिकारियों के पास और कॉल सेंटरों पर फोन कर रहे हैं। कोरोना के लक्षणों को लेकर प्रसार प्रसार का कोई असर ही नहीं दिख रहा है।  पढ़े लिखे लोगों द्वारा ऐसे फोन किए जा रहे हैं। 
सर्दी और बुखार में पूरे परिवार के कोरोना जांच का दबाव
पटना में रह रहे और राजनीति से जुड़े बड़े नेता ने तो पूरे परिवार के साथ जांच का दबाव बना दिया। घर वालों को सर्दी बुखार और सामान्य फ्लू था, लेकिन दबाव ऐसा बनाया  जा रहा था कि उनकी कोरोना की जांच कराई जाए। सिविल सर्जन से लेकर स्वास्थ्य विभाग के अन्य आला अधिकारियों पर दबाव बनाया गया, लेकिन ऐसा कोई लक्षण नहीं मिल  रहा था जिस कारण से नेता और उनके परिवार वालों की जांच कराई जाए। ऐसी स्थित में सिविल सर्जन और अन्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी खूब खरी खोटी सुनाई  गई। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे अगर कोरोना की जांच कराई जाए तो हर घर में लक्षण मिल जाएगा। सूत्रों की मानें तो काफी दबाव के बाद मेडिकल टीम बनाई गई जो  स्वास्थ्य परीक्षण कर सामान्य फ्लू बताई, हालांकि दो से तीन दिन में पूरा परिवार स्वस्थ्य हो गया। 
फोन की घंटी को नहीं कर सकते अनसुना
कॉल सेंटर पर काम करने वाले कर्मचारियों के साथ पुलिस और डीएम के साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समय में जैसे हालात हें वह फोन को तत्परता से उठाते हैं। कब कौन सी समस्या आ जाए और इससे निपटना पड़े इसे लेकर पूरी चौकसी होती है। लेकिन अधिकतर फोन ऐसे लोगों के आ रहे हैं जो परेशान कर रहे हैं। सिविल सर्जन से लेकर अन्य डॉक्टर भी परेशान हैं फिर भी हर कॉल पर तत्परता दिखाते हैं। लेकिन कोई सफाई के लिए सिविल सर्जन को फोन करता है तो दवा छिड़काव के लिए डीएम को। प्रचार के बाद भी सही जगह लोग फोन नहीं कर रहे हैं। कई मामले तो ऐसे भी आए हैं जिसमें केंद्र सरकार के ट्रोल फ्री नंबर पर फोन कर कोरोना होने  की सूचना दे दी गई बाद में प्रशासन की हालत खराब हो गई, जांच में मामला सामान्य फ्लू का निकला। 
ऐसे फोन करने वालों से भगवान बचाए
कॉल सेंटरों पर काम करने वालों का कहना है कि ऐसे अजब गजब कॉल करने वालों का फोन आ रहा है कि वह परेशान हो जा रहे हैं। कोई सही जानकारी के लिए फोन नहीं कर रहा है। किसी के गले में दर्द हो जा रहा है या फिर खांसी हो रही है तो सीधा फोन लगाकर कोरोना होने की बात कह रहा है। मौजूदा समय में ऐसा माहौल है कि हर कॉल को गंभीरता से लेनी है, लेकिन जब संबंधित से लक्षण पूछा जाता है तो एक साथ ऐसे दो लक्षण भी नहीं मिलते हैं जिससे कोरोना की आशंका जताई जाए।
हर फोन को अटेंड करना और उसपर गंभीरता दिखाना हमारी जिम्मेदारी है। जागरूकता का अभाव है जिस कारण से लोग सही जगह फोन नहीं करते हैं। ऐसे में उन्हें कई  बार और कई अधिकारियों को फोन करना पड़ता है। कोरोना के लक्षण को लेकर भी ऐसा ही है, सामान्य फ्लू में भी लोग परेशान हो जा रहे हैं और कोरोना की आशंका जताने  लग रहे हैं। इस लड़ाई में लोगों को जागरूक होना होगा।
- डॉ. राज किशोर चौधरी, सिविल सर्जन  

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